नई दिल्ली। संपूर्णा संस्था ने रविवार को नई दिल्ली में पॉश (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निवारण) अधिनियम पर एक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला की अध्यक्षता संपूर्णा की संस्थापिका अध्यक्ष व समाजसेवी डॉ. शोभा विजेंद्र ने की। इस कार्यशाला में 10 चयनित सदस्यों ने भाग लिया, जिन्हें पेशेवर स्वयंसेवकों के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
डॉ. शोभा विजेंद्र ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सम्पूर्णा के भीतर प्रशिक्षित एवं समर्पित पेशेवरों की एक ऐसी टीम तैयार करना है, जो जागरूकता फैलाने और पॉश अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि जागरूकता और उचित प्रशिक्षण के अभाव में यह अधिनियम अक्सर पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाता।
डॉ. शोभा विजेंद्र ने प्रतिभागियों को पॉश अधिनियम की पृष्ठभूमि, महत्व एवं उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि हम विशेष रूप से कार्यरत महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं, तो पॉश अधिनियम का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम सत्र में अधिनियम के प्रमुख पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें इसकी पृष्ठभूमि एवं आवश्यकता, जागरूकता एवं क्रियान्वयन में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका, आंतरिक समिति (आईसी) एवं स्थानीय समिति (एलसी) की जिम्मेदारियां और पॉश मामलों को संवेदनशीलता एवं पेशेवर तरीके से संभालने के विषय शामिल रहे। सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में वास्तविक जीवन के पॉश मामलों के उदाहरणों पर भी चर्चा की गई। साथ ही, लाइव स्क्रीन प्रस्तुति ने सीखने के अनुभव को और समृद्ध बनाया।
डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने उपस्थित सदस्यों के बीच सार्थक संवाद को प्रोत्साहित किया और इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया। उन्होंने कहा कि अगली कार्यशाला का आयोजन 16 मई को किया जाएगा।












