लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज ऊर्जा निगम प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदेश के बिजली कर्मचारी भीषण गर्मी के बीच उपभोक्ताओं और किसानों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं, किंतु इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा उन पर दमन और उत्पीड़न की कार्यवाहियां की जा रही हैं, जो अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य हैं।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि उत्पीड़न की कार्यवाहियां तत्काल प्रभाव से वापस नहीं ली गईं, तो बिजली कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश और प्रबंधन का दमनात्मक रवैया ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति को जन्म देगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसी बीच प्रबंधन द्वारा पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के संचालन एवं अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने का अचानक लिया गया निर्णय कर्मचारियों के आक्रोश को और भड़काने वाला है। संघर्ष समिति ने दोहराया कि जनता के धन से निर्मित ऊर्जा परिसंपत्तियों को किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय की घोषणा के बाद से विगत 517 दिनों से प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी निरंतर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि जिस दिन निजीकरण का टेंडर जारी किया जाएगा, उसी दिन प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारी सामूहिक “जेल भरो आंदोलन” प्रारंभ करेंगे।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा शांतिपूर्ण आंदोलनों के बावजूद कर्मचारियों पर लगातार दमनात्मक कार्रवाइयां की जा रही हैं। मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देश एवं समझौते के बावजूद आज तक वापस नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में 16 अप्रैल से प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है।
इस जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज हाथरस और मथुरा में बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों की सभाएं आयोजित की गईं, जिन्हें संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी श्री जितेंद्र सिंह गुर्जर, श्री महेंद्र राय एवं श्री मोहम्मद वसीम ने संबोधित किया।












