बस्ती – जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बस्ती द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ न्यायमूर्ति राम मनोहर नरायण मिश्र, प्रशासनिक न्यायमूर्ति, बस्ती मण्डल के द्वारा ज्ञान की देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। ज्ञातव्य है कि प्रशासनिक न्यायमूर्ति एक दिवसीय दौरे पर बस्ती सेशन डिवीजन के निरीक्षण एंव कामकाज की समीक्षा के लिए बस्ती आये थे। प्रशासनिक न्यायमूर्ति का स्वागत जनपद न्यायाधीश शमसुल हक एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बस्ती देवेन्द्र कुमार-प्रथम ने पौधा देकर तथा न्यायिक अधिकारी द्वारा पुष्प गुच्छ देकर किया। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने इस अवसर पर जिला कारागार, बस्ती की ओर से लगायी गयी प्रदर्शिनी का फीता काटकर उद्घाटन किया तथा न्यायालय परिसर में न्यायिक अधिकारियों के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम में सम्मिलित होते हुए वृक्षारोपण किया। वादकारियों तथा अधिवक्तागण की सुविधा के लिए लगाये गये लिफ्ट एवं कॉरिडोर का उद्घाटन भी किया। उक्त अवसर पर प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने परिवार न्यायालय में सुलह-समझौता कर साथ-साथ रहने को तैयार दंपत्तियों को बधायी दी तथा उनके सुखमय जीवन की शुभकामनाएँ दी।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बस्ती द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के कुल 60,802 वादों का निस्तारण किया गया जिसमें बैंक ऋण व अन्य प्रकार से सम्बन्धित प्री-लिटिगेशन स्तर पर 58,246 मामलों का एवं न्यायालयों के 2,556 वादों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर कराया गया। उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा कुल 65 मामले निस्तारित किए गए जिसमें रू 94,70,000 की धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की गई एवं आपराधिक वादों के निस्तारण के फलस्वरूप कुल रू.71,800 की धनराशि अर्थदण्ड के रूप में वसूल की गयी एवं अन्य सभी मामलों में कुल रू० 5,08,02,373, इस प्रकार कुल रू 6,03,44,173 की धनराशि वसूल की गई।
उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला कारागार, बस्ती में निरूद्ध बन्दियों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प कला तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग की ओर से एक जिला एक उत्पाद के तहत उत्पादों की प्रदर्शिनी भी लगाई गई, जो आम जन के क्रय हेतु भी उपलब्ध थी एवं न्यायिक अधिकारीगण तथा कर्मचारीगण एवं अन्य द्वारा उक्त सामग्रियों को क्रय भी किया गया था।
राष्ट्रीय लोक अदालत में किया गया कुल 60,802 वादों का निस्तारण
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