*महीना भर भी नहीं टिक पाए साहब; छेड़खानी से लेकर दुष्कर्म तक के मामलों में ‘सेटिंग-गेटिंग’ के आरोपों ने डुबोई लुटिया।*
*पीड़िताओं पर बयान बदलने का दबाव बनाने वाली महिला दरोगा भी रडार पर, कोर्ट की फटकार से खाकी हुई शर्मसार।*
रिपोर्ट:ब्यूरो कार्यालय।
महराजगंज।जनपद के तेज-तर्रार पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने जिले की कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए प्रशासनिक सर्जरी तो की है, लेकिन इस सर्जरी में सबसे बड़ा झटका निचलौल के थानाध्यक्ष मदन मोहन मिश्र को लगा है। महज एक महीने के भीतर ही साहब की थानेदारी छीन ली गई। महकमे में चर्चा है कि यह कोई सामान्य तबादला नहीं, बल्कि साहब के ‘काले कारनामों’ पर एसपी का कड़ा प्रहार है। निचलौल पुलिस की इस किरकिरी के बाद अब खाकी के रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
*केस नंबर 1: नाबालिग पीड़िता को तीन बार बदलवाई तहरीर, रक्षक ही बने भक्षक!*
मदन मोहन मिश्र के कार्यकाल में न्याय की उम्मीद लेकर आने वालों को सिर्फ प्रताड़ना मिली। बरोहिया निवासी एक नाबालिग लड़की ने गांव के ही एक रसूखदार लड़के पर छेड़खानी और नारी पवित्रता हनन का गंभीर आरोप लगाया था। न्याय की आस में पीड़िता एक हफ्ते तक निचलौल थाने के चक्कर काटती रही, लेकिन ‘मैनेजमेंट’ में मशगूल थानाध्यक्ष का दिल नहीं पसीजा।
आरोप है कि साहब ने पीड़िता की तहरीर को तीन बार बदलवाया। जब थक-हारकर पीड़िता ने एसपी शक्ति मोहन अवस्थी की चौखट पर गुहार लगाई, तब जाकर कप्तान के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ। लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं हुआ; पुलिस ने अपराधी को बचाने के लिए कहानी को कमजोर कर दिया।
*महिला दरोगा नंदनी यादव का ‘घिनौना खेल’ और कोर्ट की फटकार।*
हद तो तब हो गई जब थाने में तैनात महिला उप-निरीक्षक नंदनी यादव भी इस पाप की भागीदार बन गईं। पीड़िता का आरोप है कि महिला दरोगा ने धारा 161 के तहत बयान बदलने का मानसिक दबाव बनाया। लेकिन पीड़िता डिगी नहीं। जब पीड़िता को जिला न्यायालय में पेश किया गया, तो उसने पुलिसिया दबाव और अपनी पूरी आपबीती जज साहब के सामने खोलकर रख दी। इस पर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए मौके पर मौजूद उप-निरीक्षक संदीप को जमकर फटकार लगाई, जिससे निचलौल पुलिस की इज्जत कोर्ट रूम में ही नीलाम हो गई।
*केस नंबर 2: दुष्कर्म जैसे संगीन मामले का ‘3 लाख 35 हजार’ में सौदा!*
निचलौल पुलिस के कारनामों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। पचमा निवासिनी एक महिला ने गांव के ही एक युवक पर बलात्कार का संगीन आरोप लगाया था। इस मामले में तो साहब ने सारी हदें पार कर दीं। पीड़ित महिला पर चौतरफा दबाव बनाकर मामले को कथित तौर पर 3 लाख 35 हजार रुपये में ‘मैनेज’ करा दिया गया। इस खुली सौदेबाजी से इलाके के अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए और निचलौल थाना न्याय का मंदिर न रहकर ‘डीलिंग सेंटर’ बन गया।
*खबरों से डरकर बनाया दबाव, पर ‘ऊपर वाले के यहां देर है, अंधेर नहीं’।*
जब मदन मोहन मिश्र के ये कारनामे मीडिया की सुर्खियां बनने लगे, तो साहब ने अपनी कमियां छुपाने के लिए पत्रकारों और शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन कहते हैं न कि पाप का घड़ा एक दिन जरूर भरता है। कप्तान शक्ति मोहन अवस्थी की पैनी नजरों से साहब का यह ‘मैनेजमेंट’ छुप नहीं सका और आखिरकार उनकी ताजपोशी छीनकर उन्हें लूप लाइन में धकेल दिया गया।निचलौल क्षेत्र की जनता अब राहत की सांस ले रही है और इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे के उन अधिकारियों में हड़कंप मचा है जो खाकी की आड़ में दलाली का धंधा चमका रहे थे।












