दशकों तक यूरोप की मानसिकता रही है, ‘भारत सपेरों का देश है’, यह मानसिकता, गाहे-बगाहे आज भी दिख जाती है, भले ही भारत आर्थिक और सामरिक महाशक्तियों में शुमार क्यों न हो। नॉर्वे की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया है। एक नॉर्वेजियन अखबार ने प्रधानमंत्री मोदी का कार्टून छापा, जिसमें उन्हें सपेरे की तरह दिखाया गया।
भारत और भारत समर्थक देशों में इस कार्टून को लेकर आक्रोश है। लोग इसे नस्लवादी बता रहे हैं और पुरानी यूरोपीय औपनिवेशिक सोच का उदाहरण बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने कार्टून की जमकर आलोचना की है। लोगों ने कहा है कि भारत आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बन रहा है, फिर भी पुरानी मानसिकता से बदहाल यूरोप बाहर नहीं निकल पा रहा है।
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तस्वीर पर क्या कह रहे हैं लोग?
कार्टून पर एक अमेरिकन नागरिक कार्ल वेल्स ने लिखा, ‘नॉर्वे के सबसे बड़े अखबार ने अभी-अभी PM मोदी का एक कार्टून छापा है, जिसमें उन्हें एक सपेरे के रूप में दिखाया गया है और उन्हें ‘एक धूर्त और परेशान करने वाला आदमी’ कहा गया है। यह पत्रकारिता नहीं है। यह तो औपनिवेशिक दौर का नस्लवाद है, जिसे टिप्पणी का चोला पहना दिया गया है। वे भारत के बढ़ते कद को पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए वे उन्हीं घिसे-पिटे रूढ़ियों का सहारा ले रहे हैं, जिनका इस्तेमाल उनके दादा-दादी किया करते थे। हर बार उनका असली चेहरा सामने आ ही जाता है।
नॉर्वे को लोगों ने बताया नस्लवादी
कुछ लोगों ने लिखा कि यह कार्टून नस्लवादी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी कह चुके हैं दुनिया भारत को सांप-सपेरों का देश समझती थी, अब वही सोच दोहराई जा रही है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लेंग ने PM मोदी के संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग में भारत में प्रेस की आजादी और मानवाधिकार को लेकर सवाल उठाए। अब लोग, कह रहे हैं कि यूरोप को पहले अपनी गंदी मानसिकता से बाहर आने की जरूर है।
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पीएम मोदी भी कह चुके हैं सपेरे वाली बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में अमेरिका के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भाषण देते हुए कहा था कि पहले भारत को सपेरों का देश माना जाता था, अब यह तकनीक का देश बन गया है। इस कार्टून को लेकर, नॉर्वे अब भारत समर्थकों के निशाने पर है।












