जिनेवा/नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि तकनीक को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही भारत का सबसे बड़ा विधिक और स्वास्थ्य लक्ष्य है। उन्होंने यह बात स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान फेफड़ों की स्वास्थ्य जांच पर आयोजित उच्चस्तरीय कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन ‘स्टॉप टीबी पार्टनरशिप’ की ओर से किया गया, जिसकी सह-मेजबानी भारत, जापान, फिलीपींस और जाम्बिया ने की।
नड्डा ने कहा कि समय पर स्क्रीनिंग, बीमारी की शीघ्र पहचान और सभी लोगों को समान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान दुनिया का सबसे बड़ा जांच और शीघ्र निदान अभियान बन चुका है। इसके तहत घर-घर जाकर जांच, मोबाइल स्वास्थ्य टीमों, सामुदायिक अभियानों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि दूरदराज और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में मॉलिक्यूलर जांच प्रणाली, डिजिटल छाती एक्स-रे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण और हैंडहेल्ड स्क्रीनिंग डिवाइस का बड़े स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। नड्डा ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत ऐप’ में ‘खुशी’ नाम का कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बहुभाषी चैटबॉट जोड़ा गया है, जो मरीजों को लक्षण, जांच केंद्र और उपचार संबंधी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराता है।
केंद्रीय मंत्री ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार फेफड़ों की बीमारियों की जांच को और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने वैश्विक सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि सस्ती जांच सुविधाएं, डिजिटल उपकरण, बेहतर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं और स्थायी वित्तीय सहायता टीबी उन्मूलन के लिए बेहद जरूरी हैं। नड्डा ने कहा कि भारत दुनिया के देशों, नवाचारकर्ताओं और स्वास्थ्य संगठनों के साथ मिलकर टीबी के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।











