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पचबस में स्थित लगभग 30 हेक्टेयर में फैला पचवस ताल, जिसे कभी एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना थी, आज प्रशासन की घोर उपेक्षा का शिकार है। कभी यहां झील और नौका विहार शुरू करने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन आज यह ताल पूरी तरह सूख चुका है और जलकुंभी व कटीली झाड़ियों से पट गया है। हालात इस कदर बदतर हैं कि वन विभाग द्वारा ताल के संरक्षण के लिए लगाए गए अधिकांश पेड़ भी पानी और देखरेख के अभाव में सूख चुके हैं। वर्ष 2023 में इस ताल के सुंदरीकरण और जीर्णोद्धार पर मनरेगा के तहत लगभग 30 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में ताल के किनारे मजबूत बांध का निर्माण, सिल्ट-सफाई कार्य, पर्यटकों के चलने के लिए पाथ-वे और एक आकर्षक मनरेगा पार्क स्थापित करना शामिल था। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने इसे मॉडल पर्यटक स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए कार्य का विधिवत शुभारंभ किया था। उन्होंने कड़े निर्देश दिए थे कि वर्षा ऋतु से पहले बांध का काम पूरा कर लिया जाए ताकि पानी को एकत्रित किया जा सके, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट रही। लाखों की लागत से बना मनरेगा पार्क अब केवल झाड़ियों का ढेर अफसरों की लापरवाही और रखरखाव न होने की वजह से लाखों रुपये की लागत से लगाए गए पौधे समय से पहले ही दम तोड़ गए। पूरा ताल एक बार फिर जलकुंभी और जंगली झाड़ियों के जाल में तब्दील हो चुका है। सबसे बुरा हाल उस मनरेगा पार्क का है, जिसे पर्यटकों के बैठने के लिए बनाया गया था; आज वह पार्क केवल कटीली झाड़ियों का एक ढेर मात्र बनकर रह गया है, जिससे उसकी मूल पहचान ही पूरी तरह खो चुकी है। जनता के टैक्स का पैसा सीधे तौर पर बर्बाद होता नजर आ रहा है। इलाके के जागरूक निवासियों—धर्मेंद्र सिंह, संजय पाठक, विजय सिंह, मनीष सिंह और सुनील पाठक का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण एक बेहतरीन प्राकृतिक धरोहर बर्बाद हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि इस ताल को आगामी वर्षा ऋतु से पहले पूरी तरह साफ कराकर इसके बांधों को दुरुस्त कर दिया जाए, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए वर्षा जल संग्रहण (वाटर हार्वेस्टिंग) का एक बहुत बड़ा और अचूक स्रोत बन सकता है। इसके साथ ही, अगर इसे वादे के मुताबिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पूरे क्षेत्र की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे। जिम्मेदार बोले—’मुझे जानकारी नहीं इस पूरे मामले और बदहाली को लेकर जब खंड विकास अधिकारी (BDO) अवध प्रताप सिंह से बात की गई, तो उनका गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें पचवस ताल को झील और पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की किसी भी पुरानी योजना की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने आगे जुड़ते हुए कहा कि वे स्वयं मौके पर जाकर पूरी स्थिति का जायजा लेंगे। यदि जांच में ताल में गंदगी या मनरेगा पार्क में झाड़ियां पाई जाती हैं, तो तत्काल उनकी सफाई का कार्य सुनिश्चित कराया जाएगा।
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पचबस में करोड़ों की योजनाएं धरी रहीं:30 लाख खर्च के बाद भी झाड़ियों का ढेर बना, देखरेख के अभाव में योजनाएं फेल
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