लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से मांग की है कि भीषण गर्मी के दौर में पटरी से उतर रही बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने हेतु हटाए गए अनुभवी संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए तथा बिजली कर्मियों पर अनावश्यक रूप से चल रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तुरंत समाप्त किया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उपलब्ध होने के बावजूद उपभोक्ताओं को भीषण गर्मी में घंटों बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि प्रदेश का ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क 32,000 से 33,000 मेगावाट की बिजली आपूर्ति को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं है। संघर्ष समिति ने कहा कि नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में गंभीर और दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए, किंतु यह कार्य रातों-रात संभव नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि उपलब्ध बिजली को प्रभावी ढंग से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए तथा फॉल्टों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। किंतु 20 हजार से अधिक संविदा कर्मियों को हटाए जाने, राजधानी लखनऊ सहित कई शहरों में लागू की गई वर्टिकल व्यवस्था के कारण नियमित पदों को कमजोर किए जाने तथा अव्यवस्थित कार्य प्रणाली के चलते बिजली होते हुए भी उपभोक्ताओं तक निर्बाध आपूर्ति नहीं पहुंच पा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर एवं अभियंता भीषण गर्मी में दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हुए उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, किंतु प्रबंधन का असहयोगपूर्ण, असंवेदनशील एवं असहिष्णु रवैया बिजली व्यवस्था के लिए सबसे अधिक घातक सिद्ध हो रहा है।
संघर्ष समिति ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष को बिजली व्यवस्था सामान्य बनाए रखने के विषय में संघर्ष समिति से तत्काल वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि वह पूरी तरह सहयोग के लिए तैयार है, किंतु यह प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह संघर्ष समिति से सार्थक विचार-विमर्श कर ऐसी कार्ययोजना तैयार करे जिससे उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े और प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।












