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स्टे ऑर्डर के बावजूद युवक को भेजा जेल:HC ने सिद्धार्थनगर पुलिस पर लगाया 5 लाख का मुआवजा, थाना प्रभारी पर कार्रवाई के आदेश


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्धार्थनगर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। एक युवक के गिरफ्तारी पर रोक के बावजूद जेल भेजे जाने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इटवा थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। हाईकोर्ट ने इसे न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना माना है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अंतरिम संरक्षण आदेश लागू होने के बावजूद किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजना बेहद गंभीर मामला है। FIR को चुनौती देते हुए HC में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल मामला सिद्धार्थनगर के इटवा थाने में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें अनिल सोनी के खिलाफ बीएनएस और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। अनिल सोनी ने एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की थी। इस पर अदालत ने 1 अप्रैल 2026 को उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि स्टे ऑर्डर के बावजूद इटवा पुलिस ने 4 अप्रैल 2026 को अनिल सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परिजनों और अधिवक्ताओं ने पुलिस को कोर्ट आदेश की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल होने के बाद भी युवक जेल में बंद रहा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब गिरफ्तारी पर रोक का आदेश पारित हुआ, उस समय सरकारी अधिवक्ता अदालत में मौजूद थे। ऐसे में पुलिस द्वारा आदेश की जानकारी न होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रदेश में यह चिंताजनक स्थिति बनती जा रही है कि या तो सरकारी अधिवक्ता अदालत के आदेश संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंचाते, या पुलिस अधिकारी जानबूझकर आदेशों की अनदेखी करते हैं। खंडपीठ ने कहा कि पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को भी आदेश की जानकारी भेजी गई थी, इसके बावजूद युवक को रिहा नहीं किया गया। बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 29 अप्रैल 2026 को अनिल सोनी को जिला जेल सिद्धार्थनगर से रिहा किया गया। थाना प्रभारी से भी वसूली कर सकती है सरकार कोर्ट ने थाना प्रभारी के आचरण को गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि एक माह के भीतर पीड़ित को 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहे तो यह राशि संबंधित थाना प्रभारी से वसूल सकती है। 13 जुलाई तक मांगी अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को 13 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन न होने की स्थिति में एसपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है।

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