नासिरगंज कस्बे में शिया समुदाय की ओर से बुधवार और गुरुवार को तीन धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सभी कार्यक्रमों को बिहार से आए मौलाना जनाब जुल्फेकार हैदर नकवी ने संबोधित किया। कार्यक्रम हुसैनिया इमामबाड़े में आयोजित हुए, जहां बड़ी संख्या में समुदाय के लोग शामिल हुए। बुधवार को 9 जिलहिज्जाह के अवसर पर हजरत मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत की याद में मजलिस आयोजित की गई। मौलाना नकवी ने कहा कि हजरत मुस्लिम इमाम हुसैन के चचेरे भाई और कूफा में उनके प्रतिनिधि थे। उन्हें 9 जिलहिज्जाह 60 हिजरी को कूफा में शहीद कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि उनके दोनों मासूम बेटों मोहम्मद और इब्राहिम को भी शहादत का जाम पीना पड़ा था। मजलिस में नौहा, मरसिया और सोजख्वानी का भी आयोजन हुआ। बकरीद (ईद-उल-अज़हा) के मौके पर हुसैनिया इमामबाड़े में ईद की नमाज अदा की गई। नमाज की इमामत मौलाना जुल्फेकार हैदर नकवी ने की। नमाज के बाद खुतबा पढ़ा गया और देश में अमन, तरक्की तथा आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। हुसैनिया इमामबाड़े में गुरुवार रात दिवंगत आत्माओं के ईसाले सवाब के लिए विशेष मजलिस आयोजित हुई। इसमें मरहूमीन की मगफिरत और उनके दर्जों की बुलंदी के लिए दुआ-ए-खैर की गई। मौलाना नकवी ने कहा कि अपने पूर्वजों के लिए दुआ करना और उन्हें ईसाले सवाब पहुंचाना हर मोमिन की जिम्मेदारी है। उन्होंने अहलेबैत की पवित्र जीवनी, उनके सब्र और दृढ़ता पर भी प्रकाश डाला। तीनों कार्यक्रमों में नासिरगंज के शिया समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अंजुमन हुसैनिया की ओर से की गईं। प्रत्येक मजलिस के बाद तबर्रुक का वितरण भी किया गया।
नासिरगंज में शिया समुदाय के तीन धार्मिक कार्यक्रम:मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत पर मजलिस, ईद की नमाज और ईसाले सवाब की महफिल
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