लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि शीर्ष प्रबंधन के एकतरफा एवं अव्यावहारिक निर्णयों ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में उपभोक्ता बिजली संबंधी समस्याओं से परेशान हैं और बिजली कर्मी अत्यधिक कार्यभार, संसाधनों की कमी तथा उत्पीड़नात्मक नीतियों के बीच कार्य करने को विवश हैं।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पहले किसी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था के लिए संबंधित जेई अथवा एसडीओ प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी होते थे, जिससे उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होता था। किंतु वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद कार्यों को विभिन्न विंगों में विभाजित कर दिए जाने से जवाबदेही लगभग समाप्त हो गई है। आज उपभोक्ता यह तक नहीं समझ पा रहा है कि उसकी समस्या के समाधान के लिए वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी कौन है।
नई व्यवस्था में शिकायत निस्तारण को 1912 हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टलों तक सीमित कर दिया गया है। शिकायतें तो दर्ज हो रही हैं, लेकिन उनका समयबद्ध समाधान नहीं हो पा रहा है। गलत बिलिंग, मीटर संबंधी समस्याएं, लंबे विद्युत अवरोध तथा तकनीकी खामियों के कारण आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ग्राउंड लेवल पर समन्वय पूरी तरह समाप्त हो गया है। बिलिंग, मीटरिंग एवं लाइन संचालन की अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण छोटे-छोटे कार्यों के लिए उपभोक्ताओं को अनेक स्तरों पर भटकना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि शीर्ष प्रबंधन जमीनी वास्तविकताओं से पूरी तरह कटा हुआ है और कर्मचारियों एवं अभियंताओं के अनुभव तथा सुझावों की उपेक्षा करते हुए तुगलकी निर्णय थोप रहा है। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू करने के साथ-साथ 20-25 वर्षों का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मियों को कार्य से बाहर कर दिया गया, जिसके दुष्परिणाम अब विद्युत व्यवस्था और उपभोक्ताओं दोनों को भुगतने पड़ रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में उत्तर प्रदेश की विद्युत मांग देश में सर्वाधिक स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे समय में प्रदेश के बिजली कर्मचारी एवं अभियंता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशों के अनुरूप उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने हेतु पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ दिन-रात कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन कर्मचारियों एवं अभियंताओं से संवाद तक करने को तैयार नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियंताओं द्वारा अनेक व्यावहारिक एवं सकारात्मक सुझाव दिए गए, लेकिन उन पर विचार करने के बजाय प्रबंधन लगातार उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां कर रहा है। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है तथा विद्युत व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की विफल व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर उसे वापस लिया जाए, अनुभवी संविदा कर्मियों की सेवाएं पुनः बहाल की जाएं, सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाएं तथा कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर व्यावहारिक एवं जवाबदेह व्यवस्था लागू की जाए।












