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खाते का नंबर बदलकर ATM बनवाया, 35 लाख निकाले:आईसीआईसीआई बैंक का पूर्व कर्मचारी गिरफ्तार, दो साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा


सिद्धार्थनगर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने आईसीआईसीआई बैंक के एक पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। उस पर बैंक ग्राहक के खाते से लगभग 35 लाख रुपए की साइबर ठगी का आरोप है। पुलिस ने सोमवार को दो साल की जांच के बाद इस मामले का खुलासा किया। आरोपी ने ग्राहक के खाते में दर्ज मोबाइल नंबर बदलकर नया एटीएम कार्ड बनवाया और यूपीआई के जरिए लाखों रुपए निकाले। पुलिस के अनुसार, पीड़ित अब्दुल बारी फतेउल्लाह का खाता सिद्धार्थनगर स्थित आईसीआईसीआई बैंक शाखा में था। साल 2024 में उनके खाते से करीब 35 लाख रुपए संदिग्ध परिस्थितियों में निकल गए थे। रकम गायब होने की जानकारी मिलने पर उनके रिश्तेदार हाशिम अनवर ने साइबर क्राइम थाना सिद्धार्थनगर में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद साइबर पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर लगातार जांच कर रही थी। जांच में पता चला कि बैंक के एक पूर्व कर्मचारी ने ही इस ठगी को अंजाम दिया था। आरोपी ने ग्राहक के खाते में दर्ज मोबाइल नंबर बदल दिया और उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद उसने नया एटीएम कार्ड जारी करवाकर प्राप्त किया और खाते से जुड़ा यूपीआई सक्रिय कर विभिन्न माध्यमों से रकम निकाल ली। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने यह धनराशि अपने परिचितों के खातों में भी स्थानांतरित कर निकलवाई थी। लगभग दो साल की जांच और साक्ष्य संकलन के बाद, साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक श्याम सुंदर तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सोमवार को आरोपी मो. शबान अख्तर को गिरफ्तार किया। वह संतकबीरनगर जनपद के दुधारा थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। आरोपी बस्ती जनपद के पैकोलिया थाना क्षेत्र के पेंडरिया का निवासी है। पूछताछ में शबान अख्तर ने ग्राहक के खाते में बड़ी धनराशि देखकर लालच में आकर पूरी साजिश रचने की बात स्वीकार की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी पूर्व में आईसीआईसीआई बैंक में कर्मचारी था और बैंकिंग प्रक्रियाओं की जानकारी का लाभ उठाकर उसने धोखाधड़ी को अंजाम दिया। मामले में भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
जनपद में बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग से जुड़े इस बड़े साइबर अपराध के खुलासे को साइबर पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका रही या नहीं तथा ठगी की रकम का कितना हिस्सा बरामद किया जा सकता है।

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