नई दिल्ली। सीबीएसई की 12वीं कक्षा के परिणामों में कथित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार और सीबीएसई पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को सेवा के बजाय कारोबार का माध्यम बनाया जा रहा है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि सीबीएसई की ओर से अंक संबंधी त्रुटियों को सुधारने के लिए छात्रों से विभिन्न मदों में शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए प्रति विषय 100 रुपये, पुनर्गणना के लिए प्रति पेपर 100 रुपये तथा पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये तक शुल्क देना पड़ता है। उनके अनुसार, यदि किसी छात्र को कई विषयों में आपत्ति दर्ज करनी हो तो उसे करीब 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि यदि बोर्ड की गलती से अंक गलत दर्ज हुए हैं तो उसकी कीमत छात्रों से वसूलना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों द्वारा पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना के लिए आवेदन किए जाने से बोर्ड को बड़ी राशि प्राप्त होती है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी या मानवीय त्रुटियां हुई हैं तो उसका आर्थिक बोझ छात्रों और उनके परिवारों पर क्यों डाला जा रहा है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘गलती सीबीएसई की, सजा बच्चे की और कमाई सरकार की’। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा को यदि सेवा के बजाय व्यापार बना दिया जाए तो समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि वे और बढ़ जाती हैं। इसका सबसे अधिक असर छात्रों के आत्मविश्वास, समय और भविष्य पर पड़ता है।इससे पहले राहुल गांधी ने कुछ सीबीएसई छात्रों के साथ बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया था। वीडियो में छात्रों ने परिणामों को लेकर अपनी शिकायतें और परेशानियां सामने रखीं।
छात्रों का कहना था कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी समस्याएं उठाईं तो उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा और कुछ लोगों ने उन्हें देशविरोधी तक कह दिया। सीबीएसई परिणामों को लेकर उठे इस विवाद ने शिक्षा व्यवस्था, मूल्यांकन प्रक्रिया और छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सीबीएसई परिणाम विवाद पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला, शिक्षा व्यवस्था पर उठाये सबाल
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