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TGM1 जीन डिफेक्ट से पीड़ित था प्लास्टिक बेबी:10 साल के इलाज के बाद 80% तक सामान्य हुआ बच्चा, दिल्ली-मुंबई से आते थे इंजेक्शन


अक्टूबर 2016 में जन्मा प्लास्टिक या कोलोडियन बेबी अब 80 प्रतिशत तक ठीक हो चुका है। बहराइच के निजी क्लीनिक में उसका 10 साल से इलाज चल रहा था। परिजनों के अनुसार जन्म के समय बच्चे की हालत इतनी गंभीर थी कि बच्चा न ठीक से सांस ले पा रहा था और न ही रो पा रहा था। जन्म के तुरंत बाद डॉक्टरों ने उसे गंभीर स्थिति में लखनऊ रेफर कर दिया। लेकिन परिजन उसे बहराइच के निजी अस्पताल में ले गए। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आईसीयू में भर्ती किया। शुरुआत के करीब 20 दिन बच्चे को गहन निगरानी में रखा गया। उसकी हालत ऐसी थी कि वह सामान्य तरीके से दूध भी नहीं पी सकता था। डॉक्टरों को उसे ट्यूब के जरिए दूध देना पड़ा। डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे के शरीर में किसी प्रकार की सामान्य गतिविधि नहीं थी। जांच और रिसर्च के दौरान पता चला कि वह TGM1 जीन डिफेक्ट नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है। यह बीमारी त्वचा के सामान्य विकास को प्रभावित करती है और ऐसे बच्चों की त्वचा मोटी झिल्ली जैसी बन जाती है। इस दौरान अमेरिका के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज अग्रवाल से भी सलाह ली गई और इलाज की नई रणनीति तैयार की गई। देखें प्लास्टिक बेबी की कुछ तस्वीरें… अब विस्तार से जानें पूरा मामला श्रावस्ती के भेला गांव निवासी तरन्नुम ने अक्टूबर 2016 में इस बच्चे को जन्म दिया था। परिजन उसे लेकर विभिन्न अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन आखिरकार बहराइच के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिशिर के पास पहुंचे। यहीं से बच्चे की जिंदगी बचाने की असली जंग शुरू हुई। इलाज आसान नहीं था। बच्चे को लगातार विशेष प्रोटीन और एल्ब्यूमिन इंजेक्शन दिए गए, जो मुंबई और दिल्ली से मंगाए जाते थे। इसके साथ नियमित फिजियोथेरेपी और त्वचा की विशेष देखभाल भी की गई। डॉक्टर बताते हैं कि इस सफलता में बच्चे के परिजनों की जागरूकता की भी बड़ी भूमिका रही। परिवार हर फॉलोअप पर समय से पहुंचा और डॉक्टरों के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया। धीरे-धीरे बच्चे की त्वचा में सुधार होने लगा और शरीर की असामान्य झिल्ली कम होती गई। आज 10 साल बाद बच्चा हंसता है, रोता है, बात करता है और सामान्य बच्चों की तरह जीवन जीने की कोशिश कर रहा है। हालांकि डॉक्टरों के अनुसार उसकी त्वचा कभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकेगी। एक लाख में एक मामला डॉक्टर के अनुसार, इस तरह के ‘प्लास्टिक बेबी’ के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। चिकित्सा विज्ञान में लगभग एक लाख बच्चों में एक ऐसा मामला देखने को मिलता है और उनमें भी बहुत कम बच्चे इस स्तर तक ठीक हो पाते हैं। इससे पहले भी बिहार और पंजाब के अमृतसर में कोलोडियन बेबी का जन्म हुआ था। लेकिन कुछ ही दिन में उनकी मौत हो गई। कंसैंग्विनियस मैरिज से अधिक रिस्क उन्होंने बताया कि करीबी रिश्तेदारी (कंसैंग्विनियस मैरिज) में विवाह होने पर ऐसी आनुवंशिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण और परिवार में पहले से मौजूद जेनेटिक बीमारी की हिस्ट्री भी जोखिम बढ़ाती है। ऐसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है और मामूली संक्रमण भी उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। होने वाली संतान को 5 प्रतिशत जीन डिफेक्ट का खतरा डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा अब काफी हद तक सामान्य जीवन जी रहा है, लेकिन भविष्य में उसकी संतान में भी 3 से 5 प्रतिशत तक जीन डिफेक्ट का खतरा बना रहेगा। इसके बावजूद 10 साल पहले जिस बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद बेहद कम थी, उसका आज मुस्कुराना और बोलना चिकित्सा विज्ञान, शोध और धैर्य की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। ——————————– यह खबर भी पढ़ें- विराट कोहली IPL जीतने के बाद प्रेमानंदजी से मिलने पहुंचे:पत्नी अनुष्का भी साथ थीं; वृंदावन आश्रम में दोनों नंगे पैर चलते नजर आए IPL जीतने के बाद क्रिकेटर विराट कोहली और पत्नी अनुष्का शर्मा ने वृंदावन में संत प्रेमानंद के दर्शन किए। दोनों मंगलवार सुबह 7 बजे केली कुंज आश्रम पहुंचे। चेहरे पर मास्क लगाकर कार से उतरे और नंगे पांव आश्रम के अंदर गए। यहां पढ़ें पूरी खबर

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