वाराणसी । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 54वें जन्मदिन पर शुक्रवार को धर्म नगरी काशी में उनके समर्थकों और हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। कार्यकर्ता और युवा जगह—जगह मुख्यमंत्री के दीर्घ स्वस्थ जीवन के लिए हवन पूजन कर रहे है। इसी क्रम में राजेंद्र प्रसाद घाट पर माँ गंगा निषाद राज सेवा समिति के तत्वावधान में निषाद समाज के युवाओं ने मां गंगा का विधिवत दुग्धाभिषेक कर मुख्यमंत्री के दीर्घायु जीवन की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री की तस्वीर को प्रतीक रूप से मिष्ठान खिलाया और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर जन्मदिन मनाया। इसमें राष्ट्रवादी हिंदू शक्ति वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र कुमार निषाद (बम्बू ) प्रकाश साहनी छोटू ,सोनू साहनी , संतोष कुमार, अमित साहनी ,विवेक निषाद आदि शामिल रहे। इसी क्रम में हरहुआ स्थित 51 फीट ऊंचे वरद आंजनेय हनुमान मंदिर में मुख्यमंत्री के लंबी आयु के लिए कामना की गई। मंदिर में मुख्यमंत्री योगी के लिए विशेष हवन पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान उनके समर्थकों ने उनके 54वें जन्मदिन पर 54 किलो लड्डू से बने विशेष केक को काटकर उनका जन्मदिन मनाया। इस दौरान मंदिर परिसर में भारी संख्या में उनके समर्थक मौजूद रहे।
विप्र समाज ने मनाया योगी का जन्मदिन,ब्राह्मणों ने बाँटी मिठाईयाँ, पढ़े वेद मंत्र
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 54वें जन्मदिन पर शुक्रवार को काशी में विप्र समाज के बटुकों ने वेद मंत्रों का पाठ करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। इसके बाद मिठाइयां भी बाटी। कार्यक्रम संयोजक भाजपा नेता व विप्र समाज के अध्यक्ष डा. पवन शुक्ला ने इस दौरान कहा कि हिंदुत्व के पुरोधा कहे जाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ के महंत से लेकर कुशल राजनीतिज्ञ बनकर उभरे हैं। गोरक्षपीठ के कठिन प्रबंधन की जिम्मेदारी को निभाते हुए प्रदेश के विकास में रोड़ा बनने वाले माफियाओं के मंसूबे को बुलडोजर से ध्वस्त कर इन्होंनें विकास की राह में आने वाली बाधाओं के चक्रव्यूह को तोड़ दिया है। डा. पवन शुक्ला ने बोला कि परिवार को छोड़कर संत बनने, संत से गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी और फिर सांसद से दूसरी बार प्रदेश के सफल मुख्यमंत्री बनने के सफल सात साल बीतने के बाद तक के उनके सियासी सफर के बीच उन्होंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव भी देखे। कठिन दिनचर्या और आक्रामक तेवर के बीच उन्हें जेल भी जाना पड़ा, लेकिन वे डिगे नहीं। पूरे प्रदेश में संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की योजना लागू करना विप्र समाज के लिए दूरदर्शी कदम है।












