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‘पहले भी तो होता था’, जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस के समय के पेपर लीक गिना डाले

कई दिनों के हंगामे के बाद आखिरकार मंगलवार से पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में बहस शुरू हो गई है। केंद्र की सत्ताधारी सरकार की ओर से मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेपर लीक के मुद्दे पर कहा कि पेपर लीक की घटनाएं तो अलग-अलग सरकारों में होती रही हैं। उन्होंने कहा कि इसी के चलते सरकार को लगा कि इसके लिए एक व्यापक कानून की जरूरत है। कांग्रेस सांसदों की ओर से विरोध में आवाज भी उठी लेकिन जितेंद्र सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पेपर लीक की पुरानी घटनाएं भी गिनवा डालीं। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 के बारे में जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की नीति ईमानदार है और यह संशोधन विधेयक भी ईमानदार प्रयास के तहत लाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने परीक्षाओं के पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधान वाले इस विधेयक को लोकसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया। जितेंद्र सिंह ने सोमवार को यह विधेयक सदन में पेश किया था लेकिन इस पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मंगलवार को गतिरोध समाप्त होने के बाद सदन में चर्चा शुरू हुई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक सरकार की छात्रों के कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता वाला है। उन्होंने कहा कि इसे भारतीय संसद के इतिहास में मील का पत्थर कहा जा सकता है।

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कांग्रेस के जमाने के पेपर लीक गिनवाने लगे मंत्री

जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षाओं में गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक आदि की घटनाएं पहले भी होती रहीं हैं और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारों के दौरान ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने साल 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा, 2011 में अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा, उसी साल पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा, 2010 में उत्तर प्रदेश में बीएड प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी और 2012 में एम्स नई दिल्ली प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक होने का दावा करते हुए कहा कि यह सूची लंबी है।

विपक्ष की ओर से NEET प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक होने का जिक्र किए जाने पर मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘मैं उस पर भी आ रहा हूं। घटनाक्रम पर एक-एक करके बात कर रहा हूं। दुर्भाग्य से यह घटनाक्रम बहुत पहले शुरू हुआ था।’ उन्होंने कहा कि सरकार को लगा कि इस संबंध में एक व्यापक कानून की जरूरत है। जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘देश में उच्च शिक्षा में परीक्षाओं का प्रबंधन करने के लिए एनटीए जैसी एजेंसी की सिफारिश 1992 और 2010 में भी की गई थी लेकिन पता नहीं इस पर क्यों विचार नहीं किया गया। जो भी कारण और हित रहे हों।’

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2024 में लाए कानून का भी जिक्र

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का गठन 2017 में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने ही किया। जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘आपका (कांग्रेस का) अधूरा काम मोदी सरकार ने पूरा किया। पेपर लीक के खिलाफ सरकार 2024 में ही विधेयक लाई थी जिसे जून 24 में लागू भी कर दिया गया। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में आज के संशोधन विधेयक के माध्यम से कड़े प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं।’ उन्होंने इस तरह के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का भी जिक्र किया जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ दिन पहले की थी।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये फास्ट ट्रैक अदालतें घटना रिपोर्ट दर्ज होने के पांच महीने के अंदर आखिरी निर्णय देंगी जो इस संशोधन विधेयक का बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने कहा, ‘सरकार की प्रतिबद्धता का इसी बात से अनुमान लगा सकते हैं कि इसी विधेयक के साथ ही कानून मंत्री ने प्रस्ताव जारी किया है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने की प्रक्रिया साथ ही शुरू की जाए।’ उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें पहले ही गठित की जा चुकी हैं और आने वाले दिनों में बाकी जगहों पर इनकी स्थापना होगी। जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि सरकार की नीति ईमानदार है और यह संशोधन विधेयक भी ईमानदार प्रयास के तहत लाया जा रहा है।


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