Homeदेश (National)एशिया क्यों बन रहा दुनिया का सबसे खतरनाक परमाणु क्षेत्र?

एशिया क्यों बन रहा दुनिया का सबसे खतरनाक परमाणु क्षेत्र?

जब भी दुनिया के दो देशों के बीच तनाव बढ़ने की खबर आती है तो सबसे पहले परमाणु हथियारों की चर्चा शुरू हो जाती है। आज के समय में दुनिया के 9 देशों के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी नई ईयरबुक जारी की है। जिसमें दुनिया भर के सैन्य हथियारों और रक्षा क्षमताओं से जुड़े आंकड़े दिए गए हैं। इसी रिपोर्ट में परमाणु हथियारों के जखीरे का भी ब्योरा शामिल है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ संकेत मिलता है कि एशिया तेजी से दुनिया का सबसे संवेदनशील और खतरनाक परमाणु क्षेत्र बनता जा रहा है।

SIPRI 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक दुनिया के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार हैं। यह संख्या 2025 के 12,241 हथियारों की तुलना में थोड़ी कम है। इनमें से 9,745 परमाणु हथियार सैन्य भंडार में रखे गए हैं, जबकि 4,012 हथियार तैनात स्थिति में हैं और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

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किस महाद्वीप के पास कितने परमाणु हथियार हैं?

परमाणु हथियारों के मामले में यूरोप सबसे आगे है। यूरोप के पास कुल 6,015 परमाणु हथियार हैं, जिनमें रूस के पास 5,420, फ्रांस के पास 370 और ब्रिटेन के पास 225 हथियार मौजूद हैं। वहीं उत्तरी अमेरिका में अकेले अमेरिका के पास 5,042 परमाणु हथियारों का जखीरा है। दूसरी ओर, एशिया के पास कुल 1,130 परमाणु हथियार हैं, जो यूरोप और उत्तरी अमेरिका की तुलना में काफी कम हैं। इसके बावजूद एशिया को दुनिया का सबसे खतरनाक परमाणु क्षेत्र माना जा रहा है।

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एशिया के सबसे खतरनाक परमाणु क्षेत्र बनने के 3 मुख्य कारण

  • एशिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार वाले देश:
    SIPRI 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के जिन 9 देशों के पास परमाणु हथियारों का सैन्य भंडार है उनमें सबसे ज्यादा देश एशिया में हैं। एशिया के 5 देशों के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। इनमें चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल शामिल हैं। वहीं, उत्तरी अमेरिका में केवल अमेरिका के पास परमाणु हथियार हैं। दूसरी तरफ यूरोप में रूस, फ्रांस और ब्रिटेन ऐसे देश हैं जिनके पास परमाणु हथियारों का भंडार मौजूद है।
  • एशियाई देशों के बढ़ते परमाणु हथियार:
    SIPRI 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भले ही उत्तरी अमेरिका और यूरोप के पास एशिया की तुलना में कहीं ज्यादा परमाणु हथियार हैं लेकिन पिछले साल के मुकाबले इन दोनों महाद्वीपों के परमाणु हथियारों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। दूसरी तरफ, एशियाई देशों ने अपने परमाणु जखीरे को और मजबूत किया है। यूरोप के पास 2025 में 5,974 परमाणु हथियार थे। 2026 में यह संख्या 41 घट गई। वहीं उत्तरी अमेरिका के पास 2025 में 5,177 परमाणु हथियार थे, जो 2026 में 135 कम हो गए। इसके उलट एशिया में परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ी है। साल 2025 में एशिया के पास 1,090 परमाणु हथियार थे, जबकि 2026 में इसमें 40 हथियारों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • हमले के लिए पूरी तरह तैयार:
    अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन के मिसाइल लॉन्चर अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सतर्क और हर समय कार्रवाई के लिए तैयार स्थिति में हैं। वहीं, चीन और भारत दोनों ने अपनी परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बियों (SSBN) पर परमाणु मिसाइलों की तैनाती भी शुरू कर दी है। जनवरी 2026 के आकलन के अनुसार, चीन ने अपनी पनडुब्बियों और मिसाइलों पर करीब 34 परमाणु हथियार तैनात कर दिए हैं, जबकि भारत ने लगभग 12 परमाणु हथियार तैनात किए हैं।

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