सिद्धार्थनगर जिले में क्षय रोग (टीबी) नियंत्रण अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक नई व्यवस्था लागू की है। अब टीबी के मरीजों को नियमित दवा लेने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जांच और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीजों को उनके घर के नजदीक स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) से ही दवा उपलब्ध कराई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को राहत मिलेगी। जिले के कुल 270 आयुष्मान आरोग्य केंद्रों को इस व्यवस्था से जोड़ा गया है। इन केंद्रों के माध्यम से मरीजों को उनके निवास स्थान से तीन से चार किलोमीटर के दायरे में ही दवा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मरीजों का समय और धन दोनों बचेगा, साथ ही उपचार की निरंतरता भी सुनिश्चित होगी। टीबी के उपचार में मरीजों को लंबे समय तक नियमित दवा का सेवन करना होता है। उपचार के दौरान दवा की एक भी खुराक छूटने या बीच में बंद करने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के लिए बार-बार अस्पताल पहुंचना अक्सर मुश्किल होता है। आर्थिक तंगी, परिवहन की समस्या और अधिक दूरी के कारण कई मरीज समय पर दवा नहीं ले पाते। इसके परिणामस्वरूप, कुछ मरीज बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी के साथ-साथ संक्रमण फैलने का जोखिम भी बढ़ जाता है। इस समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने दवा वितरण व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने का निर्णय लिया है। अब मरीज को केवल जांच और बीमारी की पुष्टि के लिए ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज जाना होगा। पंजीकरण के बाद मरीज का पूरा विवरण संबंधित आयुष्मान केंद्र को भेजा जाएगा। इसके उपरांत मरीज को नियमित दवा उसी केंद्र से उपलब्ध कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आशा और स्वास्थ्य कार्यकर्ता मरीजों से संपर्क कर दवा लेने और उपचार जारी रखने के लिए प्रेरित भी करेंगे।
टीबी मरीजों को अब आयुष्मान केंद्र पर मिलेगी दवा:सिद्धार्थनगर में अस्पतालों के बार-बार चक्कर लगाने से मिलेगी निजात
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