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सिद्धार्थनगर में खाद वितरण में फर्जीवाड़ा उजागर:दो प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निरस्त, संचालकों पर एफआईआर


सिद्धार्थनगर जिले में उर्वरक वितरण में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। कृषि विभाग ने गड़बड़ी और स्टॉक में हेराफेरी के आरोप में दो उर्वरक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। जांच में भौतिक स्टॉक और पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक के बीच गंभीर अंतर पाया गया। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद दोनों प्रतिष्ठानों के संचालकों के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। जिला कृषि अधिकारी रवि शंकर पाण्डेय ने बताया कि मेंसर्स एग्रीजक्सन वन स्टाप, आनन्दनगर (इटवा) और जैफुल्लाह खाद भंडार, बेलवा (खुनियांव) की जांच की गई थी। निरीक्षण के दौरान इन प्रतिष्ठानों पर वास्तविक उर्वरक स्टॉक और पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक में भारी अंतर मिला। साथ ही, किसानों को उर्वरकों के वितरण में भी निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया गया। कृषि विभाग के अनुसार, उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन के माध्यम से बिक्री अनिवार्य की है। इसका उद्देश्य प्रत्येक बोरी खाद का ऑनलाइन रिकॉर्ड सुनिश्चित करना है। इसके बावजूद, इन प्रतिष्ठानों में सामने आई अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए उनके लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन ने केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रहते हुए कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद, दोनों प्रतिष्ठानों के संचालकों के खिलाफ संबंधित थानों में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई गई है। इससे आगे की जांच और दंडात्मक कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य उर्वरक विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है। कृषि विभाग ने सभी लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं को सख्त चेतावनी जारी की है। विभाग ने निर्देश दिया है कि उर्वरकों का वितरण केवल पीओएस मशीन के माध्यम से और किसान की जोत के अनुसार ही किया जाए। ओवररेटिंग, स्टॉक में गड़बड़ी, कालाबाजारी या रिकॉर्ड में हेराफेरी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि किसानों के हितों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और बिक्री व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में जिले भर में उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच और तेज की जाएगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण से लेकर एफआईआर तक की कार्रवाई जारी रहेगी।

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