लखनऊ। आठवें वेतन आयोग की टीम द्वारा 22 से 23 जून को लखनऊ में आयोजित बैठकों में राज्य कर्मचारियों,शिक्षकों तथा बिजली कर्मियों के संगठनों को वार्ता के लिए निर्धारित न दिए जाने पर आज विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से तीव्र विरोध दर्ज कराया। रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित संयुक्त वार्ता में ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन. तिवारी, राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष आर.के. निगम, राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष एसएस. मिश्र,राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राजेश सिंह तथा अन्य कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ कहा कि आठवां वेतन आयोग देशभर में राज्यों का दौरा कर कर्मचारियों के वेतन एवं सेवा परिस्थितियों का अध्ययन कर रहा है। किंतु लखनऊ प्रवास के दौरान आयोग द्वारा अखिल भारतीय सेवाओं के संगठनों को वार्ता का अवसर देना और राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों तथा बिजली कर्मियों के संगठनों को पूरी तरह नजरअंदाज करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और भेदभावपूर्ण है। शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि आठवें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि आयोग अपनी संस्तुतियां देने से पूर्व राज्यों की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करेगा, क्योंकि वेतन आयोग की सिफारिशों का वित्तीय भार राज्यों को वहन करना पड़ता है। ऐसे में राज्य कर्मचारियों और बिजली कर्मियों के संगठनों का पक्ष सुने बिना कोई भी समग्र एवं न्यायपूर्ण रिपोर्ट तैयार नहीं की जा सकती।
राज्य कर्मचारियों व बिजली कर्मियों के संगठनों ने जताया विरोध
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