नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स स्टेट हाउस में राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ आधिकारिक बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और टिकाऊ विकास के लिए साझा प्रतिबद्धता को फिर दोहराया। इस दौरान सेशेल्स में यूपीआई लाने, संपर्क बढ़ाने और सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े समझौते हुए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति हर्मिनी ने भारत और सेशेल्स की लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को फिर से दोहराया और विकास साझेदारी, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, आर्थिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के दौरान तय हुई बातों को लागू करने में हुई प्रगति का स्वागत किया, जिसमें 17.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज के तहत चल रही परियोजनाएं भी शामिल हैं।
दोनों नेता स्वास्थ्य सेवा, कृषि, डिजिटल भुगतान, समुद्री सहयोग, विकास साझेदारी, अंतरिक्ष सहयोग, कानूनी सहयोग और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के लिए कई समझौता ज्ञापनों और समझौतों के आदान-प्रदान के साक्षी बने।
दोनों पक्षों ने भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक यादगार लोगो भी लॉन्च किया। दोनों नेता सेशेल्स में प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर की आधारशिला रखे जाने के कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के बाद साझा प्रेस वक्तव्य में कहा, “सेशेल्स की यात्रा का संदेश स्पष्ट है। भारत ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है, जहाँ समुद्री सुरक्षा के साथ आर्थिक समृद्धि भी बढ़े। जहाँ हमारी साझेदारी आकार नहीं, आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित हो। जहाँ हम हर देश के पास-पास नहीं, साथ-साथ चलें।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि आज जन औषधि पर किए गए करार से सेशेल्स के लोगों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती दवाएं और उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा यूपीआई को सेशेल्स में लागू करने के लिए समझौता किया जा रहा है। वहीं, भारत और सेशेल्स के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा।
अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन से सम्मानित किए जाने पर सेशेल्स के राष्ट्रपति का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सम्मानित किया जाना उनके लिए और 140 करोड़ भारतवासियों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। वे इस सम्मान को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हुए उन सभी देशों को समर्पित करते हैं जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती से लड़ रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण को भावी पीढ़ियों के प्रति अपना दायित्व मानते हैं।












