नई दिल्ली: यूरोप की सबसे बड़ी कार निर्माता Volkswagen अपने इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक की तैयारी कर रही है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी CEO ओलिवर ब्लूम लागत घटाने, कारोबार को अधिक लाभदायक बनाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्गठन की योजना बना रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी लगभग 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी करने और जर्मनी में चार फैक्ट्रियां बंद करने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो यह Volkswagen के इतिहास का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जाएगा।
Volkswagen पिछले कुछ वर्षों से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। यूरोप में कारों की मांग उम्मीद से कम रही है, वहीं अमेरिका की नई व्यापार नीतियों और आयात शुल्क(Tariffs) ने लागत बढ़ा दी है। दूसरी ओर, चीन की इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicle-EV) कंपनियां कम कीमत में बेहतर विकल्प पेश कर रही हैं, जिससे Volkswagen जैसी पारंपरिक कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। इन परिस्थितियों में कंपनी खर्च कम करने और अपने कारोबार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, Volkswagen अपने पैसेंजर कार डिवीजन और कंपोनेंट बनाने वाले व्यवसाय को अलग-अलग इकाइयों में बांटने की संभावना भी तलाश रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने से कंपनी के लिए फैसले लेना आसान होगा और कारोबार को अधिक कुशल तरीके से चलाया जा सकेगा। हालांकि, इस कदम को लागू करना आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए शेयरधारकों और नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी।
Volkswagen के सामने एक बड़ी चुनौती जर्मनी का Volkswagen Law भी है। यह विशेष कानून कंपनी में कर्मचारियों और जर्मनी के Lower Saxony राज्य को महत्वपूर्ण अधिकार देता है। इसी वजह से किसी फैक्ट्री को बंद करने या बड़े बदलाव लागू करने के लिए व्यापक सहमति की जरूरत पड़ती है। कर्मचारी संगठन IG Metall पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे ऐसी किसी भी योजना का विरोध करेंगे, जिससे कर्मचारियों के अधिकार कमजोर हों।
विश्लेषकों का मानना है कि Volkswagen के पास अब बड़े बदलाव करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। कंपनी के पास Audi, Skoda, Porsche, Bentley और Lamborghini समेत कई ब्रांड हैं, लेकिन इसके बावजूद कंपनी का बाजार मूल्य (Market Value) उसकी कुछ प्रमुख संपत्तियों से भी कम आंका जा रहा है। कई निवेशकों का मानना है कि कारोबार को सरल बनाकर और कम लाभ वाले हिस्सों को अलग करके कंपनी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
हालांकि, Volkswagen ने अभी इन योजनाओं पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह सिर्फ जर्मनी ही नहीं बल्कि वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए भी एक बड़ा बदलाव होगा। आने वाले महीनों में कंपनी की रणनीति, कर्मचारियों के साथ बातचीत और शेयरधारकों की मंजूरी पर सभी की नजर रहेगी।












