लखनऊ। आम तौर पर ढूंढे न मिलने वाले लेखपाल बुधवार एक जुलाई से ग्राम सचिवालयों में नियमित बैठेंगे। इस दौरान ग्रामीणों को आय, जााित एवं निवास प्रमाणपत्र तथा खतौनी के लिए तहसील के चक्कर नहीं लगाने होंगे। राजस्व परिषद की ओर से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर रोस्टर तैयार कर इस व्यवस्थाको लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों में स्थापित ग्राम सचिवालयों का उद्देश्य विभिन्न विभागों की सेवाओं को ग्रामीणों तक आसानी से गांव में ही एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। पंचायतीराज विभाग द्वारा ग्राम सचिवालयों में संबधित विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। ग्राम सचिवालयों के माध्यम से पंचायत सहायकों द्वारा आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल सहित लगभग दस प्रमुख सेवाएं ग्रामीणों को उपलब्ध कराने के आदेश पूर्व में दिेये गये हैं। इन सेवाओं के समय से निस्तारण में लेखपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऐसे में ग्राम सचिवालय में उनकी नियमित उपलब्धता से ग्रामीणों को तहसील के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी। राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कितहसील दिवस, थाना दिवस, वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवादों का निस्तारण, कृषि गणना, जनगणना, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्ट, अवैध कब्जों की जांच, खनन संबंधी सत्यापन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े सत्यापन तथा धान-गेहूं क्रय केंद्रों के सत्यापन जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्व भी लेखपाल निभाते हैं।
इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में भी लेखपालों की रिपोर्ट और सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है। ग्रामीणों को कई बार लेखपाल से मिलने के लिए तहसील या अन्य स्थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस नई व्यवस्था से ग्राम सचिवालय ग्रामीणों के लिए ‘वन स्टॉप सर्विस सेंटर’ के रूप में विकसित होंगे।












