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बस्ती के अमहट घाट पर लगभग चार करोड़ रुपये की लागत से बना एक आधुनिक अंत्येष्टि स्थल सात सालों से अनुपयोगी पड़ा है। साल 2019 में लोकार्पण के बाद से यहां एक भी अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। रखरखाव के अभाव में परिसर जर्जर हो गया है, इंटरलॉकिंग धंस गई है और चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। इस अंत्येष्टि स्थल का लोकार्पण 14 जनवरी 2019 को तत्कालीन नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने किया था। शहरवासियों को इससे आधुनिक सुविधाओं वाले श्मशान घाट की उम्मीद थी। हालांकि, यह परियोजना स्थानीय लोगों की पारंपरिक रीति-रिवाजों और जरूरतों के अनुरूप नहीं रही। लोग आज भी कुछ दूरी पर स्थित पुराने मूड़घाट पर ही अंतिम संस्कार करना पसंद करते हैं, जिसके कारण नया परिसर अनुपयोगी बना हुआ है। पिछले वर्षों में इस परिसर के उपयोग के लिए कई प्रस्ताव आए। इसे कभी शहनाई घर में बदलने की योजना बनी तो कभी पार्क विकसित करने का सुझाव दिया गया। हालांकि, इनमें से कोई भी योजना साकार नहीं हो सकी, जिससे करोड़ों रुपये की यह सरकारी संपत्ति बिना उपयोग के धीरे-धीरे खराब होती जा रही है। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष नेहा वर्मा ने बताया कि इस परिसर को पार्क के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने के बाद विकास कार्य तुरंत शुरू कर दिए जाएंगे।
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बस्ती में 4 करोड़ से बना अंत्येष्टि स्थल बेकार पड़ा:2017 में लोकार्पण हुआ, एक भी अंतिम संस्कार नहीं
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