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1 करोड़ शिक्षकों में अब 55% महिलाएं, बेटी पढ़ भी रही, पढ़ा भी रही, कैसे? समझिए

22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत में एक कैंपेन की शुरुआत की थी। नाम था ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।’ योजना में कवायद की गई थी कि शिशु लिंगानुपात बेहतर हो, महिलाओं का सशक्तीकरण और वे देश के विकास में बराबर की भागीदार हों।

महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय की संयुक्त पहल वाली यह योजना कितनी कारगर हुई, इसका असर जमीन पर क्या दिखा, क्या आकंड़े सुधरे, सरकार खुद अब इसे साफ कर रही है।

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‘बेटियां पढ़ भी रही हैं’

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) ने ‘स्कूल इन इंडिया’ रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि स्कूलों में लड़कियों की नामांकन दर भी बढ़कर 48.4 प्रतिशत हो गई है। यह दर, बीते साल 2024-25 में 48.3 प्रतिशत थी। शिक्षा विभाग की लगातार कोशिशों से लड़कियों की पढ़ाई में हिस्सेदारी बढ़ रही है।

बेटियां पढ़ भी रहीं हैं और पढ़ा भी रही हैं?

UDISE+ की ‘स्कूल इन इंडिया’ रिपोर्ट कहती है कि शैक्षिक सत्र 2025-26 के आंकड़े बता रहे हैं कि अब स्कूलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है। कुल शिक्षकों की संख्या में से करीब 54.9 फीसदी महिला शिक्षक हैं।

स्त्री और पुरुष समानता की दिशा में इसे सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है। महिला महिला शिक्षकों की बढ़ती संख्या स्कूलिंग के सभी स्तरों पर देखने को मिल रही है। सरकार इसे जेंडर-सेंसिटिव माहौल के लिए बेहतर मान रही है।

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भारत में प्राथमिक शिक्षा से लेकर 12वीं तक पढ़ाई में स्कूलों अब बेहतर हो रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में लड़कियों की स्थिति लगातार सुधर रही है। साल 2025-26 में स्कूलों में लड़कियों का नामांकन 48.4 प्रतिशत हो गया है। यह पिछले कुछ साल की तुलना में थोड़ा बढ़ा है। स्कूलों में महिला शिक्षिकाओं की संख्या भी बढ़कर 54.9 प्रतिशत पहुंच गई है। पिछले चार वर्षों में लड़कियों के नामांकन में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है।

कैसे साल-दर-साल सुधर रहे हैं आंकड़े?

साल 2022-23 में यह 48 प्रतिशत था। साल 2025-26 में यह आंकड़ा 48.4 प्रतिशत हो गया। महिला शिक्षकों की संख्या में ज्यादा सुधार देखा गया है। 2022-23 में जहां 52.3 प्रतिशत महिला शिक्षक थीं, वह 2025-26 में बढ़कर 54.9 प्रतिशत हो गई हैं।

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कितने बदल गए हैं स्कूल?

स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में भी काफी सुधार हुआ है। 2025-26 में 95 प्रतिशत स्कूलों में बिजली पहुंच गई है। पीने के पानी की सुविधा 99.5 प्रतिशत स्कूलों में उपलब्ध है। लड़कियों के शौचालय 98.5 प्रतिशत और लड़कों के शौचालय 97.2 प्रतिशत स्कूलों में बन चुके हैं।

हैंडवाश की सुविधा भी 96.9 प्रतिशत स्कूलों में है। पुस्तकालय वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 90.5 प्रतिशत हो गई है। दिव्यांग बच्चों के लिए भी स्कूलों को ज्यादा अनुकूल बनाया जा रहा है। 2025-26 में 58.2 प्रतिशत स्कूलों में रैंप और हैंडरेल लगाए गए हैं, जो पिछले सालों की तुलना में बेहतर सुधार दिखा रहे हैं।

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