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हरैया में समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल (2015-16) में 417.78 लाख रुपये की लागत से बनी ‘आसरा आवास’ परियोजना हैंडओवर से पहले ही जर्जर हो गई है। नगर पंचायत की 70 बिस्वा भूमि पर निर्मित इस चार मंजिला इमारत की गुणवत्ता पर निर्माण के समय से ही सवाल उठते रहे हैं। कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (संतकबीरनगर यूनिट-20) द्वारा निर्मित इस भवन को बिजली और पानी का कनेक्शन न होने के कारण नगर पंचायत प्रशासन ने अब तक हैंडओवर नहीं लिया है। इसके बावजूद, वर्ष 2019-20 में तत्कालीन एसडीएम/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा ने कोरोना काल में 78 फ्लैट आवंटित किए थे। बाद में, सौ शैय्या अस्पताल निर्माण से विस्थापित हुए 6 परिवारों को भी शेष आवास सौंप दिए गए। वर्तमान में, यहाँ 84 परिवार मूलभूत सुविधाओं के अभाव में रह रहे हैं। लोग रोशनी के लिए अवैध कटिया लगाकर बिजली का इंतजाम कर रहे हैं। तीन मंजिला इमारत में रहने वाले परिवार पानी के लिए नगर पंचायत के एक हैंडपंप पर निर्भर हैं। भवन की दीवारों में दरारें भी स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। कॉलोनी के एक बुजुर्ग निवासी हरिप्रसाद ने बताया कि यहाँ कोई मूलभूत सुविधा नहीं है और उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती। कमर दर्द से पीड़ित बुजुर्ग महिला भुनगा देवी ने कहा कि साफ-सफाई और बिजली की उचित व्यवस्था न होने से उनकी परेशानियाँ बढ़ गई हैं। डूडा बस्ती के परियोजना अधिकारी (पी.ओ.) राजेश यादव ने बताया कि हर्रैया और बभनान में आसरा आवास बने हैं, जिनमें कुछ कमियाँ रह गई थीं। उन्होंने कहा कि इन कमियों को सुधारकर हैंडओवर करने के लिए संबंधित निर्माण कंपनी और डूडा लखनऊ को पत्राचार किया गया है। स्थानीय निवासी बेबी सोनी ने बताया कि पानी की टंकी अनुपयोगी है, जिसके कारण उन्हें हर रोज बाहर से पानी लाना पड़ता है। सोनम ने गंदगी के कारण बीमारियों के फैलने पर चिंता व्यक्त की। ‘दिशा’ समिति की बैठक के बाद जारी हुए कड़े प्रशासनिक अल्टीमेटम के आखिरी दिन भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों में असंतोष बढ़ रहा है।
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हरैया में 417 लाख का आसरा आवास जर्जर:84 परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित, हैंडओवर से पहले ही जर्जर इमारत
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