बहराइच के फखरपुर इलाके में आयोजित सत्संग में संत बाबा उमाकांत महाराज शामिल हुए। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि सतगुरु की शरण में आने और उनकी दया प्राप्त करने से मनुष्य के कर्म कटते हैं। अन्यथा, व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। बाबा उमाकांत ने संतवाणी का उल्लेख करते हुए कहा, “कर्म फांस छूटे नहीं कैतिक करो उपाय, सतगुरु मिले तो ऊबरे, नहीं तो भटका खाय।” उन्होंने बताया कि पूर्व में लोगों के कर्म कम होते थे, जिससे गुरु कृपा से उनका जीवन सुखी और शांत रहता था। महाराज ने वर्तमान में बढ़ती बीमारियों, मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह, अपराध और सामाजिक अव्यवस्था का मुख्य कारण मनुष्य के गलत खान-पान, आचरण और गुरु के आदेशों से दूर होना बताया। उन्होंने जोर दिया कि जब मनुष्य गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। बाबा उमाकांत ने कहा कि संत सदैव मानव कल्याण के लिए धरती पर रहते हैं। वे समय-समय पर लोगों को सदाचार, संयम, प्रभु-स्मरण और आध्यात्मिक जीवन का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मानव जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए लोक के साथ-साथ परलोक का भी ध्यान रखना चाहिए। इस सत्संग में बाबा उमाकांत महाराज को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
बहराइच में बाबा उमाकांत का सत्संग:बोले- नामध्वनि शिविर में जप से पापों का नाश संभव
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