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नई शिक्षा नीति के बाद NCERT की किताबों में कब-कब क्या बदला और क्यों हुआ विवाद?

नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू होने के बाद NCERT ने स्कूलों की किताबों में धीरे-धीरे कई बड़े बदलाव किए। इसकी शुरुआत 2022 में कोविड-19 के दौरान सिलेबस को ‘रैशनलाइज’ यानी छोटा और व्यवस्थित करने से हुई। इसके बाद 2024 से राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत नई किताबें लागू की जाने लगीं। इन बदलावों में कई ऐसे विषय शामिल थे, जिन्हें लेकर राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों और इतिहासकारों के बीच जमकर बहस और विवाद देखने को मिला।

अब कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब को लेकर फिर विवाद छिड़ गया है। नई किताब में 1975-77 के आपातकाल, भारतीय ज्ञान परंपरा, चुनाव आयोग और मनुस्मृति से जुड़े कई नए संदर्भ जोड़े गए हैं।

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हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब NCERT की किताबों में बदलाव पर सवाल उठे हों। इससे पहले मुगल इतिहास, महात्मा गांधी की हत्या के बाद RSS पर लगे प्रतिबंध, गुजरात दंगों और लोकतंत्र से जुड़े कुछ अध्यायों में किए गए बदलाव भी विवादों में रहे थे।

कब-कब क्या बदला और क्यों हुआ विवाद?

बदलावों का दौर साल 2021-22 में शुरू हुआ। उस समय कोविड-19 की वजह से पढ़ाई में हुए नुकसान की भरपाई के लिए NCERT ने सिलेबस छोटा करने का फैसला लिया। इसके तहत कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान की किताब से संघवाद, धर्मनिरपेक्षता, नागरिकता और राष्ट्रवाद जैसे अहम अध्याय या तो हटा दिए गए या फिर उन्हें काफी छोटा कर दिया गया। वहीं, कक्षा 10 की किताबों से ‘लोकतंत्र और विविधता’ और ‘लोकतंत्र की चुनौतियां’ जैसे पूरे अध्याय भी हटा दिए गए। इस फैसले पर कई लोगों ने सवाल उठाए और कहा कि इससे बच्चों की लोकतंत्र को समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

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2023 में सबसे बड़ा विवाद तब हुआ, जब 12वीं की इतिहास की किताब से मुगल साम्राज्य से जुड़े कई चैप्टर के हिस्से हटा दिए गए। इसके अलावा महात्मा गांधी की हत्या के बाद RSS पर लगे बैन का जिक्र और गुजरात दंगों से जुड़े कुछ हिस्से भी किताब से निकाल दिए गए। इसे लेकर काफी विवाद हुआ। आलोचकों ने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, जबकि NCERT का कहना था कि यह सिर्फ रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया का हिस्सा है।

इसके बाद 2024 और 2025 में नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत नई NCERT किताबें जारी की गईं। इन किताबों में भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय इतिहास, देश की सांस्कृतिक विरासत और प्रैक्टिकल यानी अनुभव से सीखने पर ज्यादा जोर दिया गया। वहीं, मध्यकालीन इतिहास, मंदिरों के विध्वंस और भारतीय सभ्यता को नए नजरिए से पेश किए जाने को लेकर इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच नई बहस छिड़ गई।

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2026 में जुड़ा नया विवाद

2026 में आई नई सामाजिक विज्ञान की किताबों में 1975 की इमरजेंसी पर एक अलग चैप्टर जोड़ा गया है। इसमें इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी और सबसे कठिन परीक्षा बताया गया है। इसके अलावा किताबों में मनुस्मृति के एक श्लोक का जिक्र, चुनाव आयोग की भूमिका और न्यायपालिका से जुड़े नए विषय भी शामिल किए गए हैं।

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