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विक्रमजोत विकास क्षेत्र के शंकरपुर स्थित अमृत सरोवर पूरी तरह सूखा पड़ा है। जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने के उद्देश्य से बनाए गए ये सरोवर अब खुद पानी के संकट से जूझ रहे हैं। पानी की कमी के कारण आसपास के पशु-पक्षियों को अपनी प्यास बुझाने में भारी कठिनाई हो रही है। सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना का लक्ष्य गांवों में जलस्रोत विकसित कर वर्षा जल का संचयन, भूजल स्तर में सुधार और पर्यावरण संरक्षण था। हालांकि, कई गांवों में इन सरोवरों का उचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है, जिससे वे सूखने की कगार पर हैं। भीषण गर्मी और नियमित देखरेख के अभाव ने समस्या को गंभीर बना दिया है। कई सरोवरों में गाद जमा हो गई है, जबकि कुछ में पानी का स्रोत ही समाप्त हो गया है, जिसके चलते उनमें पर्याप्त पानी नहीं बचा है। गर्मी बढ़ने के साथ आवारा पशु, गौवंश और पक्षियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी की तलाश में ये पशु आबादी वाले क्षेत्रों की ओर भटक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तालाबों में पानी भरने और सफाई की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और खराब हो सकती है। ग्रामीणों ने जोर दिया कि अमृत सरोवर केवल निर्माण तक सीमित न रहकर उनके नियमित संरक्षण और रखरखाव पर भी बराबर ध्यान देना होगा। मानसून से पहले तालाबों की सफाई, गहरीकरण और वर्षा जल संग्रहण की तैयारी आवश्यक है।
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अमृत सरोवर सूखे, पशु-पक्षी पानी को तरसे:जल संरक्षण के लिए बने सरोवर अब खुद जल संकट से जूझ रहे
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