रिपोर्ट:हेमन्त कुमार दुबे।
अयोध्या।श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं (चोरी) के आरोपों के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास महाराज का बड़ा बयान सामने आया है। महंत दिनेंद्र दास ने खुलासा किया है कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत कर दी है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में अभी तक उनसे (महंत) कोई पूछताछ या संपर्क नहीं किया गया है। महंत दिनेंद्र दास के इस बयान ने ट्रस्ट के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। सूत्रों के अनुसार, निर्मोही अखाड़े के प्रमुख संत होने के बावजूद उन्हें शुरू से ही ट्रस्ट की मुख्य निर्णय प्रक्रिया से दूर (हाशिए पर) रखा गया है। इसके पीछे मुख्य कारण उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या विश्व हिंदू परिषद (VHP) की पारंपरिक विचारधारा से सीधा न जुड़ा होना माना जा रहा है। चर्चा है कि राम मंदिर ट्रस्ट की पूरी कमान और व्यवस्था वर्तमान में संघ व विहिप से जुड़े चुनिंदा पदाधिकारियों के हाथों में केंद्रित है। इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी राम शंकर यादव ‘टिन्नू’ और गोपाल राव जैसे बाहरी लोगों का हस्तक्षेप और दबदबा लगातार बना हुआ है, जिससे स्थानीय संतों में दबी जुबान असंतोष है।इस पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच महंत दिनेंद्र दास महाराज ने अपनी सादगी और संत परंपरा का परिचय दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें कभी किसी पद, प्रतिष्ठा या प्रशासनिक अधिकार की लालसा नहीं रही है। वे केवल प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण और उनके दर्शन मात्र से ही पूरी तरह संतुष्ट हैं।












