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BMC मुंबई में पहला शहर-व्यापी पैदल यात्री नेटवर्क बनाने की योजना बना रही

बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह मुंबई में पैदल चलने वालों के नेटवर्क के लिए भारत का पहला पूरे शहर में मास्टर प्लान बना रहा है। इसका मकसद मुंबई में एक ऐसा पैदल चलने वालों का नेटवर्क बनाना है जो सभी के लिए जुड़ा हुआ हो और आसानी से पहुँचा जा सके।(Mumbai To Get First-Ever Pedestrian Network)

यह प्रोजेक्ट कोई अलग काम नहीं होगा, बल्कि पैदल चलने वालों की प्लानिंग के लिए एक साइंटिफिक तरीका भी पेश करेगा। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, BMC ने सुप्रीम कोर्ट में फाइल किए गए एक एफिडेविट में ये बातें कहीं। यह एफिडेविट यूनिवर्सल फुटपाथ पॉलिसी और पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लागू करने से जुड़ी चल रही पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) में एक एप्लीकेशन के जवाब में फाइल किया गया था।

एफिडेविट के मुताबिक, प्रस्तावित मास्टर प्लान BMC के 3D सिटी मॉडल के साथ सैटेलाइट इमेजरी, LiDAR सर्वे, ड्रोन मैपिंग, डेवलपमेंट प्लान डेटा और दूसरी जियोस्पेशियल जानकारी का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा। BMC ने कोर्ट को बताया कि उसने मौजूदा पैदल चलने वालों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर वार्ड के हिसाब से डेटा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है।

सर्वे में मौजूदा फुटपाथ, मिसिंग लिंक, अलग-अलग हिस्से, कनेक्टिविटी में कमी और ऐसे हिस्से शामिल हैं जहाँ पहुँचना मुश्किल है। इसमें कहा गया है कि मुंबई में बिना फुटपाथ वाली सड़कों, पैदल चलने वालों के लिए कनेक्शन न होने, पहुंच में कमी और टूटे हुए पैदल चलने के रास्तों की पहचान करने के लिए पूरे शहर में जियोस्पेशियल मैपिंग का काम भी चल रहा है।

सिविक बॉडी ने कहा कि मैपिंग के काम को उसके 3D सिटी मॉडल के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म अधिकारियों को एक ही सिस्टम पर लोकेशन देखने की सुविधा देगा। इसमें यह भी कहा गया है कि यह प्लेटफॉर्म मास्टर पैदल चलने वालों के नेटवर्क प्लान को तैयार करने में मदद करते हुए पहुंच में कमी, अतिक्रमण और गायब सड़कों की पहचान करने में भी मदद करेगा।

एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि BMC अपने चीफ इंजीनियर (रोड्स एंड ट्रैफिक) डिपार्टमेंट के तहत एक मैकेनिज्म बना रही है। यह सिस्टम पूरे शहर में पैदल चलने वालों के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के डेटा कलेक्शन, GIS मैपिंग और मॉनिटरिंग को एक साथ लाएगा।

स्ट्रीट वेंडर्स को स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014; महाराष्ट्र रूल्स, 2016; और स्ट्रीट वेंडर्स स्कीम, 2017 के तहत टाउन वेंडिंग कमेटी के ज़रिए रेगुलेट और रिहैबिलिटेट किया जाता रहेगा।

जिस एप्लीकेशन के आधार पर यह एफिडेविट बनाया गया था, वह नवंबर 2025 में वकील सुनील आह्या ने फाइल की थी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने तब नोटिस जारी करके अथॉरिटीज़ को शहर भर में मास्टर पैदल यात्री प्लान तैयार करने, पैदल यात्री नेटवर्क की जियोस्पेशियल मैपिंग करने, फुटपाथ प्लानिंग में स्ट्रीट वेंडिंग को शामिल करने और फेज़ में लागू करने का निर्देश दिया था।

इसने कोर्ट से यह भी रिक्वेस्ट की कि वह सिविक बॉडी को हर तीन महीने में कम्प्लायंस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दे। जब इस साल जनवरी में मामले की सुनवाई हुई, तो सुप्रीम कोर्ट ने BMC से शहर भर में चुने हुए फुटपाथ हिस्सों का ऑडिट करने पर विचार करने को कहा।

इसने एप्लीकेंट को उन हिस्सों की पहचान करने की इजाज़त दी, जिनमें तुरंत सुधार की ज़रूरत थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब BMC के 20 मई के एफिडेविट को रिकॉर्ड पर ले लिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होनी है।

यह भी पढ़ें- बुलेट ट्रेन टनल-बोरिंग के काम का औपचारिक लॉन्च टाला गया

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