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बीएसएनएल का बढ़ा राजस्व, ईबीआईटीडीए 7,000 करोड़ रुपये के करीब, ग्रामीण कनेक्टिविटी मजबूत

नई दिल्ली। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का राजस्व पिछले दो वर्षों में करीब 19 प्रतिशत बढ़कर 21,000 करोड़ रुपये से 25,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि कंपनी का ब्याज, कर, मूल्यह्रास और अमूर्त परिसंपत्तियों की लागत घटाने से पहले की कमाई (ईबीआईटीडीए) 50 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 7,000 करोड़ रुपये हो गया है।

संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने एक कार्यक्रम में कहा कि स्वदेशी 4जी तकनीक, टावर और ग्रामीण कनेक्टिविटी विस्तार के कारण बीएसएनएल ने वित्तीय और परिचालन स्तर पर बड़ा सुधार दर्ज किया है।

बीएसएनएल ने कार्य संस्कृति, टावरों की स्थिति और पुरानी अवसंरचना जैसी समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से दूर किया है। कंपनी ने निजी क्षेत्र जैसी जवाबदेही और लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली अपनाई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

राज्य मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहले टावर अपटाइम केवल 75 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 95 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया।

इसके लिए 50,000 टावरों में बैटरियां बदली गईं, पावर प्लांट उन्नत किए गए और पुराने केबल बदले गए। साथ ही, प्रत्येक सर्किल और राज्य स्तर पर नए मोबाइल कनेक्शन और एंटरप्राइज कारोबार के लक्ष्य तय किए गए।

उन्होंने कहा कि बीएसएनएल ने एक वर्ष के भीतर एक लाख टावरों पर स्वदेशी 4जी तकनीक शुरू की है। भारत अब गहरी स्वदेशी 4जी तकनीक विकसित करने वाले दुनिया के पांच देशों में शामिल हो गया है।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि लोगों का भरोसा वापस जीतने के लिए बीएसएनएल निजी कंपनियों की तुलना में सस्ती दरों पर सेवाएं दे रहा है। डाकघरों के माध्यम से एक रुपये के सिम कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में इंडिया पोस्ट के जरिए घर-घर जाकर बीएसएनएल सेवाओं की जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि देश के लगभग 35,000 गांव लंबे समय तक दूरसंचार सेवाओं से वंचित थे। अब तक लगभग 25,000 टावर लगाए जा चुके हैं और 10,000 अन्य टावरों पर काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जैसे क्षेत्रों में बीएसएनएल टावर लगने से लोग तेजी से पुलिस और प्रशासन से संपर्क कर पा रहे हैं, जिससे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सुधारने में मदद मिली है।

राज्य मंत्री ने बताया कि भारतनेट परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों तक उच्च गति फाइबर नेटवर्क पहुंचाने के लिए लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 15 लाख ग्रामीण घर जुड़े हैं और पहले चरण में 1.5 करोड़ घरों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में संचार अवसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में बीएसएनएल को “विश्वसनीय, गर्व का विषय और लाभकारी” कंपनी बनाने का लक्ष्य है।

 

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