लखनऊ । ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘परिवार संतृप्तिकरण अभियान’ शुरू किया है। 5 से 20 अगस्त तक इस अभियान के तहत गांव-गांव, घर-घर जाकर ऐसे पात्र परिवारों की पहचान की जाएगी। इसका उद्देश्य हर पात्र महिला को स्वरोजगार, बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हेें सशक्त बनाना । अभियान के दौरान विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और ऐसे परिवारों की पहचान करेंगे, जहां महिलाएं अभी स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा नहीं हैं। सर्वे के आधार पर उन्हें समूहों से जोड़ा जाएगा ताकि वे बचत, ऋण, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।
ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि सभी पात्र स्वयं सहायता समूहों के बैंक खाते तत्काल खुलवाने के निर्देश दिए हैं। कोई भी पात्र परिवार सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों और आजीविका के संसाधनों से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि हर महिला को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उसकी आय बढ़ाई जाए और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
वर्तमान में प्रदेश में 10 लाख 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे एक करोड़ 19 लाख से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। यही कारण है कि स्वयं सहायता समूह आज गांवों में आर्थिक बदलाव के साथ सामाजिक परिवर्तन के भी मजबूत माध्यम बन गये है।












