Homeजिला / लोकल (Local News)सीडीएस ने नौसेना कमांडरों को किया संबोधित,बदलते युद्ध स्वरूप में नई रणनीति...

सीडीएस ने नौसेना कमांडरों को किया संबोधित,बदलते युद्ध स्वरूप में नई रणनीति जरूरी


नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने बदलते भू-रणनीतिक परिदृश्य और युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप के अनुरूप सैन्य रणनीतियों में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें आर्थिक और तकनीकी आयाम भी तेजी से जुड़ रहे हैं। ऐसे में सशस्त्र बलों को समय के साथ खुद को ढालना होगा।

सीडीएस ने नौसेना कमांडरों को संबोधित करते हुए भारतीय नौसेना से भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नई योजनाएं तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में नौसेना की त्वरित तैनाती और सक्रिय भूमिका की सराहना की।

तीन दिवसीय सम्मेलन की शुरूआत नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी के उद्घाटन संबोधन से हुई। उन्होंने युद्ध की तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उभरती तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि भारतीय नौसेना को ‘भविष्य के लिए तैयार’ बल बनाया जा सके।

नौसेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच भारतीय नौसेना की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के जरिए भारत के समुद्री हितों और ऊर्जा सुरक्षा की प्रभावी रक्षा संभव हो सकी है।

सम्मेलन में संयुक्तता, क्षमता निर्माण, रखरखाव, प्रशिक्षण, विदेशी सहयोग और स्वदेशीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और राहत एवं बचाव अभियानों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
वैश्विक शक्ति संतुलन पर चर्चा करते हुए सीडीएस ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में दुनिया प्रतिस्पर्धा से संघर्ष की ओर तेजी से बढ़ी है। उन्होंने ‘नैरेटिव वॉरफेयर’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि अब युद्ध केवल मैदान में नहीं, बल्कि विचारों और सूचनाओं के स्तर पर भी लड़ा जा रहा है।

नौसेना प्रमुख ने बताया कि पिछले वर्षों में नौसेना की ऑपरेशनल तैनाती में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और समुद्र, वायु तथा पनडुब्बी क्षमताओं को लगातार मजबूत किया गया है। उन्होंने फारस की खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में नौसेना की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि स्पष्ट प्राथमिकताओं और आधुनिक तकनीकों के समावेश से भारतीय नौसेना भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments