HomeHealth & Fitnessयूपी में तीसरे मोर्चे पर चंद्रशेखर का फोकस

यूपी में तीसरे मोर्चे पर चंद्रशेखर का फोकस

 

लखनऊ । यूपी की सियासत में  तीसरे मोर्चे को मजबूत करने की कवायद तेज करते हुए नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने सोमवार को एक अहम राजनीतिक संकेत  दे दिया । उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी पार्टी का लक्ष्य एनडीए और इंडिया गठबंधन से दूर रहकर अलग सभी दलों को एक मंच पर लाकर प्रदेश में एक मजबूत तीसरा विकल्प तैयार करना है।
लखनऊ के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. मसूद अहमद ने आजाद समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर चंद्रशेखर ने कहा कि डॉ. मसूद अहमद के आने से बहुजन आंदोलन को मजबूती मिलने के साथ ही पार्टी का जनाधार भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गरीब, किसान, मजदूर और वंचित वर्ग की आवाज को मजबूत करने के लिए तीसरे मोर्चे की जरूरत है।

उनका दावा था कि आजाद समाज पार्टी प्रदेश में ऐसा राजनीतिक विकल्प तैयार करेगी, जो 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता के समीकरण तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह भी तय करेगी कि प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा? बहुजन समाज को अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगी। प्रदेश के सभी मण्डलों में प्रबुधजन आंदोलन करने एवं युवा, किसान, महिला, व्यापारी, अल्पसंख्यक को भाईचारे के साथ मिलकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी।  पुलिस कर्मियों की 8 घंटे ड्यूटी, सप्ताहिक अवकाश,12 वी तक पढ़ाई फ्री सहित कई वादों को दोहराते हुए कहा कि एक माह बाद 2027 के लिए गठबंधन की स्थिति साफ हो जायेगी।  राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर उन्होंने दो टूक कहा कि वहां तो चारी के लिए पाइप लाइन बिछा रखी थी इसलिए इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश की निगरानी में होनी चाहिए। 

 
घर-घर तक पहुंचायेंगे पार्टी की विचारधारा : डॉ. मसूद
आजाद समाज पार्टी ज्वाइन करने के बाद डॉ. मसूद अहमद ने कहा कि वह पार्टी की विचारधारा को प्रदेश के हर जिले तक पहुंचाने और संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो पार्टी का आदेश होगा उसका पालन किया जायेगा। करीब चार दशक के सियासी सफ की शुरुआत उन्होंने 1983 में बामसेफ से किया जिसके बाद बसपा में आ गये। बसपा सरकार में ही टाण्डा से विधायक एवं शिक्षा मंत्री रहे। इसके बाद 2015 में रालोद के प्रदेश अध्यक्ष बने और 2021 में कांग्रेस का दामन थांम लिया था। 

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