नई दिल्ली। चीन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में अमेरिका से आगे ना निकल जाए, इसके लिए वॉशिंगटन यानी अमेरिकी सरकार लगातार कड़े कदम उठा रही है। अमेरिका ने चीन पर कई तरह के कड़े प्रतिबंध और व्यापारिक रोक लगा दी हैं, ताकि उसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तक पहुंचने से रोका जा सके। इन प्रतिबंधों के कारण अब चीन के लिए Nvidia जैसी दिग्गज कंपनियों की आधुनिक एआई चिप्स (AI Chips) और सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनों व उपकरणों को एक्सेस करना बेहद मुश्किल हो गया है। इससे निपटने के लिए चीन की दिग्गज कंपनी Huawei टेक्नोलॉजी दावा कर रही है कि उसने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिससे वह इन प्रतिबंधों के बावजूद, 2031 तक दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट के बराबर की एडवांस्ड चिप्स बना सकेगी।
नया और अनोखा तरीका
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को शंघाई में हुए एक प्रोग्राम में हुआवे कंपनी ने मोबाइल और कंप्यूटर की चिप बनाने का एक नया और अनोखा तरीका दुनिया के सामने रखा है। कंपनी का दावा है कि इस नए तरीके से वह इंटेल, सैमसंग और टीएसएमसी (TSMC) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों पर निर्भर रहे बिना खुद ही सुपरफास्ट और ताकतवर चिप यानी प्रोसेसर बना पाएंगे। इसके लिए उन्हें उन खास मशीनों की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, जिन पर फिलहाल अमेरिका और उसके साथी देशों का कब्जा है।
बनाएगा पावरफुल चिप
कंपनी का दावा है कि उसका यह तरीका ऐसी ट्रांजिस्टर डेंसिटी हासिल कर पाएगा, जो 1.4 नैनोमीटर मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस का इस्तेमाल करके बनाई गई चिप्स के बराबर होगी।
बता दें कि ट्रांजिस्टर डेंसिटी का मतलब है कि एक चिप पर कितने छोटे-छोटे स्विच लगे हों। यह आम तौर पर कंप्यूटिंग की परफॉर्मेंस और ऊर्जा की बचत पर असर डालता है।
Huawei एडवांस मशीनों को एक्सेस नहीं कर सकता है, क्योंकि अमेरिकी सरकार ने चीन पर एडवांस्ड सेमीकंडक्टर उपकरणों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जिससे हुआवे जैसी कंपनियां चिप बनाने के लिए सबसे नए उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं।
कंपनी की योजना
रिपोर्ट के अनुसार, हुआवे का कहना है कि वह एक अलग तरह के आर्किटेक्चर के जरिए कंप्यूटिंग की क्षमता को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है। कंपनी ने बताया कि वह एक ही चिप के अंदर सर्किट की कई लेयर लगा रही है और उनके बीच डेटा के आने-जाने में लगने वाले समय को कम कर रही है। कंपनी ने इस तरीके को Tau Scaling Law कहा है। कंपनी पिछले 6 साल में 381 अलग-अलग चिप मॉडलों में इस तरीके का इस्तेमाल कर चुकी है।
यह घोषणा हुआवे और चीन के सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर अमेरिका द्वारा वर्षों से लगाई जा रही कड़ी पाबंदियों के बाद आई है। कंपनी को 2019 में अमेरिका की ट्रेड ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया था, जिससे अमेरिकी टेक्नोलॉजी तक उसकी पहुंच सीमित हो गई थी।












