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कुचायकोट विधानसभा सीट से विधायक पप्पू पांडेय की गिरफ्तारी पर अदालत ने लगाई रोक

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले की कुचायकोट विधानसभा सीट से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बाहुबली विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल तिवारी को एडीजे-3 कोर्ट से मंगलवार को राहत मिली है।

जमीन विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बचाव पक्ष की ओर से उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने पैरवी की।

अदालत में बचाव पक्ष ने जोरदार तरीके से यह दलील दी कि पूरा मामला आपराधिक नहीं, बल्कि सिविल विवाद की श्रेणी में आता है। अधिवक्ता मनन मिश्रा ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि प्रकरण के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर इसमें किसी ठोस आपराधिक मामले की पुष्टि नहीं होती।

उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से भूमि संबंधी सिविल विवाद है, जिसे अनावश्यक रूप से आपराधिक रंग देने की कोशिश की गई है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की प्रकृति को देखते हुए विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय और राहुल तिवारी की गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया।

अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख निर्धारित की है। तब तक पुलिस दोनों को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी, जिससे उन्हें अपनी कानूनी रणनीति तैयार करने का समय मिल गया है।

अधिवक्ता मनन मिश्रा ने बताया कि न्यायालय में लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल पुलिस और संबंधित प्राधिकारियों को गिरफ्तारी, संपत्ति की जब्ती या किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई से रोक दिया है।

उन्होंने कहा कि यह ‘नो कोर्सिव एक्शन’ (कोई ज़बरदस्ती वाली कार्रवाई नहीं) का आदेश है, जिसके तहत पुलिस अभियुक्तों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कदम नहीं उठा सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि 7 मई को अगली सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

उल्लेखनीय है कि विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से भू-माफियाओं को संरक्षण दिया और जमीन से जुड़े अवैध कार्यों में उनकी मदद की।

इसी आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी। जांच के बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर अदालत से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया था।

मामले में विधायक पप्पू पांडेय के साथ सतीश पांडेय का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि दोनों ने भू-माफियाओं को न केवल संरक्षण दिया, बल्कि अवैध भूमि कारोबार में सक्रिय सहयोग भी किया। हालांकि अब अदालत द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने से फिलहाल उन्हें बड़ी राहत मिल गई है।

इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि पप्पू पांडेय क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और मामला सीधे तौर पर जमीन माफिया नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है।

 

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