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बस्ती के चर्चित कबीर तिवारी हत्याकांड में सात साल बाद बड़ा न्यायिक मोड़ आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि की अदालत ने मामले में सात नामजद आरोपियों को बतौर मुलजिम तलब किया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 20 मई को उपस्थित होने का आदेश दिया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन आरोपियों के खिलाफ सीबीसीआईडी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर राहत देने का प्रयास किया था, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उन्हें पुनः विचारण के लिए बुलाया है। कबीर तिवारी कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एंठीडीह गांव के निवासी थे और एपीएन पीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके थे। 9 अक्टूबर 2019 को दिनदहाड़े मालवीय मार्ग पर एक चिकित्सक के आवास के सामने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में घटना के पीछे छात्र राजनीति से जुड़ी पुरानी रंजिश की बात सामने आई थी। जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई वादी शिवप्रसाद तिवारी ने प्रभावशाली लोगों के दबाव का आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। सीबीसीआईडी ने जांच के बाद सात आरोपियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसके बाद वादी पक्ष और गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। शासकीय अधिवक्ता की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत आरोपियों को तलब करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। वादी पक्ष के अधिवक्ता संजय कुमार उपाध्याय ने अदालत में दलील दी कि पत्रावली में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। शपथ पत्रों के आधार पर आरोपियों को राहत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि विवेचक ने केवल शपथ पत्रों के आधार पर आरोपियों को राहत दी थी, जबकि उन शपथ पत्रों का न्यायालय में परीक्षण नहीं हुआ था। इसके बाद अदालत ने अमन प्रताप सिंह, अक्षय प्रताप सिंह, मोहम्मद साद उर्फ सद्दू, समीर खान, साहिल सिंह, अवनीश सिंह और इमरान उर्फ शिबू को हत्या समेत विभिन्न धाराओं में तलब कर लिया।
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कबीर हत्याकांड में कोर्ट ने 7 आरोपियों को किया तलब:20 मई को पेश होने का आदेश, CBCID रिपोर्ट खारिज
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