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जनपद के सहकारिता क्षेत्र में डी0ए0पी0 एवं यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

 

 

 

श्रावस्ती।। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता ने बताया है कि जनपद में खरीफ मौसम की मुख्य फसल धान, मक्का एवं गन्ना है, धान की रोपाई लगभग पूर्ण हो चुकी है, इस समय कृषक बंधु द्वारा यूरिया उर्वरक की ट्रॉपड्रेसिंग की जा रही है। जनपद में जुलाई माह में यूरिया वितरण का लक्ष्य 11749 मैट्रिक टन के सापेक्ष उपलब्धता 22259.515 मै0टन तथा 13561.5 मै0टन यूरिया का वितरण कराया गया, डी0ए0पी0 का लक्ष्य 2776 मै0टन के सापेक्ष उपलब्धता 4888.225 मै0टन तथा वितरण 2617.76 मै0टन किया जा चुका है। इसी तरह एन0पी0के0 का लक्ष्य 392 मै0 टन के सापेक्ष उपलब्धता 3449.775 मै0टन तथा 1209.31 मै0टन का वितरण कृषकों के मध्य किया जा चुका है। जनपद मे अभी भी 8698 मै0टन यूरिया, 2270.47 मै0टन डी0ए0पी0 एवं 2240.46 एन0पी0के0 उपलब्ध है। जनपद मे उर्वरकों की कोई कमी नही है ‌सहकारिता क्षेत्र में डी0ए0पी0 एवं यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

जनपद में कृषकों की मांग के अनुसार उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। उर्वरक प्रदायकर्ता कम्पनी द्वारा थोक उर्वरक विक्रेता एवं फुटकर उर्वरक विक्रेताओं के द्वारा किसी भी स्तर पर उर्वरकों के साथ अप्रचलित उर्वरकों का टैग न किया जाए साथ ही उर्वरको को पी0ओ0एस0 मशीन के माध्यम से फसल संस्तुति के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री में अंकित क्षेत्रफल के आधार पर ही वितरण किया जाए, तथा किसी भी प्रकार का उर्वरक बिना पी0ओ0एस0 मशीन के द्वारा बिक्री किया जाना क्षम्य नही होगा। प्रतिष्ठान में उपलब्ध उर्वरक एवं पी0ओ0एस0 मशीन में प्रदर्शित उर्वरक स्टाक में यदि अन्तर पाया जाता है तो वैधानिक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। उर्वरक विक्रेता उर्वरक वितरण रजिस्टर को अद्यतन करते हुए वितरण करे तथा प्रत्येक किसान का मोबाइल नम्बर, फार्मर रजिस्ट्री नंबर एवं क्षेत्रफल अंकित करे। बिना फार्मर रजिस्ट्री के उर्वरक किसी को न दिया जाये। जो कृषक उर्वरक प्रतिष्ठान पर उर्वरक लेने नही जा सकता वह आधार ओ0टी0पी0 के माध्यम से अपने परिवार के किसी भी सदस्य से उर्वरक क्रय कर सकते हैं।

समस्त थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया जाता है कि वह अपना स्टाक एवं वितरण रजिस्टर प्रतिदिन अद्यतन करें। आप समस्त द्वारा नियमानुसार कृषकों में उर्वरक वितरण नहीं किया जाता है तो आपके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत विधिक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।

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