नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो गए। 18 से 21 मई तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रणनीतिक सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग साझेदारी और समुद्री सहयोग को नई गति देना है।
रक्षा मंत्री सबसे पहले वियतनाम पहुंचेंगे, जहां वह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह यात्रा विशेष महत्व रखती है। हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को और उच्च स्तर पर ले जाने पर सहमति जताई थी।
राजनाथ सिंह की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और वियतनाम रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से साझेदारी बढ़ा रहे हैं। रक्षा मंत्री वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती पर उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे। इसके बाद रक्षा मंत्री दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे, जहां वह कोरिया गणराज्य के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। बैठक में रक्षा सहयोग की समीक्षा के साथ नई संयुक्त पहलों पर चर्चा होगी। राजनाथ सिंह रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) के मंत्री ली योंग-चेओल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।
दौरे के दौरान दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन भी किया जाएगा। यह स्मारक कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान की याद में बनाया गया है। भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट ने युद्ध के दौरान दो लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया था और हजारों सैनिकों के शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सरकार का मानना है कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी’ के बीच बढ़ता तालमेल क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती देगा।












