नई दिल्ली/कील। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक जर्मनी दौरे के दौरान कील शहर स्थित टीकेएमएस (थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स) के अत्याधुनिक सबमरीन निर्माण संयंत्र का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस भी मौजूद रहे। यह संयंत्र उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण और आधुनिक नौसैनिक तकनीक के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
रक्षा मंत्री ने इस दौरे को बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि यहां प्रदर्शित तकनीक और परिचालन क्षमता काफी प्रभावशाली है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा से उन्हें आधुनिक पनडुब्बी निर्माण प्रक्रियाओं, डिजाइन, इंजीनियरिंग और तैनाती से जुड़ी जटिलताओं को नजदीक से समझने का अवसर मिला। उन्होंने संयंत्र का निरीक्षण किया और विशेषज्ञों व अधिकारियों से विस्तृत चर्चा भी की।
राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा आज वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है और इस क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के दौरे भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देंगे, खासकर नौसेना के क्षेत्र में।
इससे पहले बर्लिन में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई, जिसमें रक्षा सहयोग को और विस्तार देने, नई तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत और जर्मनी ने रक्षा संबंधों को अपनी रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने पर सहमति जताई है। इसमें तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास और रक्षा उत्पादन में सहयोग शामिल है।
भारत वर्तमान में अपनी समुद्री शक्ति और पनडुब्बी क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। ऐसे में जर्मनी जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देशों के साथ सहयोग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कील दौरा, भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को नई दिशा
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