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भनवापुर के कृषि विज्ञान केंद्र में भंडारण पर चर्चा:कृषि वैज्ञानिक ने प्याज, आलू और लहसुन सुरक्षित रखने के तरीके बताए


सिद्धार्थनगर के भनवापुर क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में शनिवार को कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने प्याज, आलू और लहसुन के भंडारण के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को इन फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के महत्वपूर्ण सुझाव दिए। डॉ. सर्वजीत ने बताया कि प्याज को खेत से लाने के बाद 4-5 दिनों तक छायादार स्थान पर सुखाएं। जब ऊपर का छिलका कागज के समान हो जाए, तब इसका भंडारण करें। भंडारण कभी सीधे जमीन पर या प्लास्टिक की बोरी में न करें। भंडारण ऐसे स्थान पर करें जहां सीधी धूप न आती हो और कमरा हवादार हो। इसमें बांस की मचान या जालीदार रैक जमीन से 1 फीट की ऊंचाई पर तैयार करें और मचान पर प्याज की 6-7 इंच मोटी परत लगाएं। इस प्रकार भंडारण से प्याज को हर दिशा से ताजी हवा लगती रहेगी, जिससे नमी सूखती रहेगी। यदि प्याज की प्रत्येक परत में लकड़ी की सूखी राख का प्रयोग किया जाए, तो राख अतिरिक्त नमी को सोखकर प्याज को फफूंद जनित बीमारियों से बचाती है। लहसुन के भंडारण के लिए, खेत से निकालने के बाद तना/डंठल न काटें। लहसुन को तने के साथ छायादार स्थान पर सुखाएं। उसके बाद तनों को आपस में गूंथकर हवादार स्थान में लटका दें, जिससे चारों तरफ से हवा लगती रहे और फफूंद न लगे। तने से जुड़े होने के कारण कलियाँ सूखती नहीं हैं। लहसुन को कभी बंद डिब्बे या प्लास्टिक की थैली में भंडारित न करें। आलू के भंडारण की बात करें तो इसे कभी प्याज के साथ या एक ही कमरे में भंडारित न करें। एक साथ रखने से आलू शीघ्र खराब हो जाता है। आलू को हमेशा अंधेरी और ठंडी जगह पर रखना चाहिए। यदि आलू को लगभग 4-5 महीने सुरक्षित रखना हो, तो सूखी रेत का प्रयोग करें। इसमें ठंडी जगह पर रेत की परत लगाएं, ऊपर आलू रखें और आलू को रेत से ढक दें। रेत नमी को अवशोषित कर लेती है और धूप से बचाती है।

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