मुड़िला शिवदत्त ग्राम में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के आठवें दिन मंगलवार रात स्वामी उत्तम कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। शास्त्री जी के द्वारा भगवान के नामकरण संस्कार और माखन चोरी लीला का विस्तार से श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि माखन चोरी का अर्थ भक्तों के मन को चुराकर उन्हें सुख और आनंद प्रदान करना तथा उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करना है। भगवान श्रीकृष्ण गोकुल छोड़कर वृंदावन गए। वृंदावन में उन्होंने वत्सासुर, अघासुर और बकासुर जैसे राक्षसों का उद्धार किया। उन्होंने कहा यमुना नदी के दूषित होने का प्रसंग सुनाया और बताया कि भगवान ने यमुना को शुद्ध करने के लिए कालिया नाग का दमन किया, जिससे यमुना जी विषमुक्त हुईं। इसके बाद उन्होंने गोवर्धन पूजन का वर्णन किया। इंद्र के अभिमान को तोड़ने के लिए भगवान ने इंद्र की पूजा बंद कराकर गोवर्धन नाथ की पूजा करवाई। इस दौरान छप्पन भोग लगाए गए और सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन जी की परिक्रमा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा से पूर्व यज्ञाचार्य शशिकांत शास्त्री ने पूजा-अर्चना और महामंगल आरती संपन्न कराई। इस आयोजन के मुख्य यजमान राजमंगल मिश्र और आयोजक कृष्णा मिश्रा ने बताया पूर्णाहुति हवन पूजन भंडारा 15 मई को आयोजित किया जाएगा जिसमे लोगो की सहभागिता का आह्वान किया है इस अवसर पर राधेश्याम गिरी, माया प्रसाद मिश्र, सुनील मिश्र, रामहित त्रिपाठी, विमलेश यादव, रामसूरत यादव, पुजारी यादव, राजू प्रजापति, मयाराम गौतम, रामकुमार वरुण, राम उजागर गौतम, राधेश्याम गौतम और रामपाल गौतम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुड़िला शिवदत्त में भागवत कथा का आठवां दिन:शास्त्री ने सुनाईं श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं का वर्णन, श्रोता भाव बिभोर
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