मानसून की अनिश्चितता और नहरों में पानी की कमी के कारण क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। धान की खेती का समय निकट होने के बावजूद अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं, जिससे फसलों और नर्सरी की सिंचाई में भारी परेशानी हो रही है। पानी की कमी से धान की तैयार नर्सरियां सूखने लगी हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है। किसान मोहम्मद अहमद, समीउल्लाह, विजय कुमार एवं सुनील कुमार का कहना है कि अगले माह धान की रोपाई का समय शुरू हो जाएगा, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं। जिन किसानों के पास निजी ट्यूबवेल नहीं हैं, वे पूरी तरह नहरों पर निर्भर हैं। नहरों के सूखे रहने से धान की नर्सरी भी सूख रही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो धान की रोपाई में देरी होगी, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। किसानों ने यह भी बताया कि उन्होंने नर्सरी तैयार करने में बीज, खाद और मजदूरी पर काफी खर्च किया है। अब नर्सरी को पर्याप्त पानी न मिलने से पौधे खराब होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट आ गया है। किसानों ने सिंचाई विभाग से नहरों में शीघ्र पानी छोड़ने की मांग की है, ताकि उन्हें राहत मिल सके और खेती का कार्य समय पर पूरा हो सके। किसानों का कहना है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कृषि कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। क्षेत्रीय किसानों की निगाहें अब प्रशासन और सिंचाई विभाग पर टिकी हैं। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि धान की फसल और किसानों की आजीविका को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
भीषण गर्मी में सूखी नहरों से बढ़ी किसानों की बेचैनी:भारत भारी में बारिश न होने से धान की नर्सरी पर मंडराया संकट
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