विजिलेंस टीम ने आज वेव मॉल से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के सरगना पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। विजिलेंस लखनऊ सेक्टर की टीम ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि बहराइच जिले के पयागपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहते हुए उन्होंने वर्ष 2012 से 2017 के बीच अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। इस मामले में थाना सतर्कता अधिष्ठान, लखनऊ सेक्टर में मुकदमा संख्या 11/2023 दर्ज है। उनके खिलाफ एनआरएचएम घोटाले से जुड़े मामलों में श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा जिले में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की भी जांच चल रही है। विधायक रहने के दौरान संपत्ति बढ़ाने के आरोप विजिलेंस के मुताबिक, लोकसेवक के रूप में कार्यकाल के दौरान मुकेश श्रीवास्तव ने ज्ञात और वैध आय स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की। प्रारंभिक जांच में इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत दंडनीय अपराध माना गया है। विजिलेंस के रिकॉर्ड के अनुसार, एफआईआर संख्या 07/2026 के तहत श्रावस्ती जिले में वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच एनआरएचएम से जुड़े कार्यों में व्यापक वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पाए गए हैं। इस मामले में आईपीसी की धारा 420, 166, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बलरामपुर-गोंडा में भी करोड़ों की अनियमितताओं के आरोप मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर संख्या 08/2026 के तहत बलरामपुर जिले में एनआरएचएम योजनाओं में गड़बड़ी का मामला दर्ज है। आरोप है कि वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में व्यापक वित्तीय अनियमितताएं हुईं। इस मुकदमे में धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। विजिलेंस के अयोध्या सेक्टर में दर्ज एफआईआर संख्या 08/2025 के अनुसार, गोंडा जिले में एनआरएचएम घोटाले से जुड़े प्रकरण में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी, 409 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। एनआरएचएम घोटाले के मुख्य आरोपी है मुकेश श्रीवास्तव विजिलेंस के अनुसार, एनआरएचएम घोटाले में मुकेश श्रीवास्तव मुख्य आरोपी है। एनआरएचएम घोटाले में मुकेश श्रीवास्तव, तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह, डॉ. सत्यदेव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीन कुमार, वरिष्ठ सहायक अजय कुमार श्रीवास्तव, अवर अभियंता राम मनोरथ मौर्य, कनिष्ठ सहायक पूनम सिंह और आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव को भी नामजद किया गया है। इनके खिलाफ बलरामपुर में मुकदमा दर्ज है। एफआईआर के मुताबिक, मुकेश श्रीवास्तव और राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर कई अनुरक्षण कार्यों में या तो काम नहीं कराया या फिर आंशिक कार्य कराकर पूरा भुगतान प्राप्त कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक प्रगति की अनदेखी करते हुए भुगतान किए गए। एक वाहन के बदले तीन वाहनों का खर्च दिखाया विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरवीएसके और सपोर्टिंग सुपरविजन योजना के तहत एक वाहन के संचालन के बदले तीन वाहनों की धनराशि निकाल ली गई। इस अनियमितता में तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह की भूमिका भी जांच में सामने आई। जांच में यह भी पाया गया कि कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। छपाई का काम बिना निविदा के कराया गया। टेंडर होने के बावजूद तत्कालीन सीएमओ द्वारा एमओआईसी को छूट देकर वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया गया। चिकित्सा प्रतिपूर्ति में 10 से 25 फीसदी तक घूस लेने के आरोप विजिलेंस जांच में आरोप है कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति वाउचरों के भुगतान के लिए 10 से 25 प्रतिशत तक रिश्वत ली जाती थी। बिना आवश्यक रजिस्टर तैयार किए भुगतान पास किए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 के दौरान बलरामपुर जिले के अस्पतालों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। वहीं वर्ष 2014 से 2019 के बीच आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन द्वारा आंशिक कार्य कराकर पूरा भुगतान लिए जाने के साक्ष्य भी मिले। कई आरोपी अधिकारी हो चुके हैं सेवानिवृत्त मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह, डॉ. सत्यदेव, डॉ. प्रवीन कुमार और अवर अभियंता राम मनोरथ मौर्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विजिलेंस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है। करीब 10 दिन पहले विजिलेंस ने मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ बलरामपुर में दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में घोटाले को लेकर भी एफआईआर दर्ज की थी। इससे पहले एनआरएचएम घोटाले के एक अन्य मामले में सीबीआई उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जमानत पर वह छूटे थे। ————— यह खबर भी पढ़िए… KGMU में मरीजों का निजी लैब एजेंट ले रहे सैंपल…VIDEO:यूरोलॉजी विभाग में प्राइवेट पैथोलॉजी के एजेंट एक्टिव, डॉक्टरों से मिलीभगत KGMU के यूरोलॉजी विभाग में वॉर्ड में भर्ती मरीज का निजी पैथोलॉजी के एजेंट द्वारा सैंपल लेने का वीडियो सामने आया है। इसमें निजी पैथोलॉजी के एजेंट खुलेआम वार्ड में पहुंचकर भर्ती मरीजों के खून के नमूने ले रहा हैं। पूरी खबर पढ़ें
लखनऊ में पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव गिरफ्तार:NRHM घोटाले का सरगना, आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस का एक्शन
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