लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर हुए लिखित समझौतों का आज तक समुचित क्रियान्वयन न होने तथा आंदोलन के दौरान एवं उसके बाद की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस न लिए जाने से प्रदेश के बिजली कर्मियों में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। संघर्ष समिति का कहना है कि समझौतों के पालन में लगातार की जा रही उपेक्षा से पावर कारपोरेशन प्रबंधन की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बिजली कर्मचारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से तीन दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एवं संघर्ष समिति के मध्य एक महत्वपूर्ण लिखित समझौता हुआ था। यह समझौता मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, आईएएस (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संपन्न हुआ था। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इस समझौते के अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं को आज तक लागू नहीं किया गया। संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के बिजली कर्मी मुख्यमंत्री के नेतृत्व और उनके निर्देशों पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि निरंतर उत्पीड़न और उपेक्षा के बावजूद भीषण गर्मी एवं बढ़ती विद्युत मांग के इस चुनौतीपूर्ण दौर में प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को निर्बाध, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए बिजली कर्मचारी पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।












