सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ में हुसैनी अखाड़े का विधिवत आगाज हुआ। नगर पंचायत शोहरतगढ़ के वार्ड नंबर 10 गांधी नगर स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाने में शनिवार रात को यह अखाड़ा शुरू किया गया। जामा मस्जिद के सदर अल्ताफ हुसैन ने इसकी अध्यक्षता की। पहले दिन अखाड़े के उस्ताद इंशान अली ने बड़ी संख्या में पहुंचे नौजवानों को तलवारबाजी और लाठी चलाने के बुनियादी गुर सिखाए। मुसाफिरखाने का प्रांगण देर रात तक ‘या अली’ के नारों और अभ्यास की ध्वनि से गूंजता रहा। उस्ताद इंशान अली ने युवाओं को हाथों की पकड़, पैरों की स्थिति, वार करने और बचाव की प्रारंभिक तकनीकें सिखाईं। उन्होंने बताया कि यह अखाड़ा हर शनिवार रात को लगेगा। इसमें युवाओं को धीरे-धीरे पारंपरिक पैतरे, चक्री, फरी-तलवार के जोड़ और लाठी के उन्नत दांव सिखाए जाएंगे। जामा मस्जिद के सदर अल्ताफ हुसैन ने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हुसैनी अखाड़ा केवल खेल या प्रदर्शन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह गंगा-जमुनी संस्कृति और सूफी परंपरा की जीवंत विरासत है। हुसैन ने आगे कहा कि यह नौजवानों को अनुशासन, आत्मरक्षा और शारीरिक दक्षता के साथ आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त ज़रिया है। उन्होंने बताया कि यह अखाड़ा मुसाफिरखाने में होने वाले धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों की कड़ी में नियमित रूप से जारी रहेगा, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। प्रशिक्षण में आसपास के दर्जनों लड़के और युवा शामिल हुए, जिनमें से कई ने पहली बार तलवार और लाठी थामी। इरशाद नामक एक स्थानीय नौजवान ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले ही दिन इतना उत्साह है कि अब वे हर शनिवार रात को अखाड़े का इंतजार करेंगे। उन्होंने बताया कि यहां अनुशासन के साथ खेल सीखने का जो माहौल मिला, वह एक अलग ही अनुभव है। उस्ताद इंशान अली ने अखाड़े के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य केवल स्टंट या प्रतियोगिता नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, धैर्य और सामूहिक सद्भाव विकसित करना है। स्थानीय निवासियों ने नगर पंचायत प्रशासन और जामा मस्जिद कमेटी के इस प्रयास को युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
शोहरतगढ़ के मुसाफिरखाने में हुसैनी अखाड़े का आगाज:नौजवानों ने सीखे तलवारबाजी और लाठी के गुर
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