ग्लास्गो। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज भारतीय खिलाड़ियों ने यादगार प्रदर्शन किए। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज भाला फेंक स्पर्धा का फाइनल मुकाबला हुआ। फाइनल में नीरज चोपड़ा समेत तीन भारतीयों ने ताल ठोकी। जिसमें नीरज ने रजत पदक जीता जबकि एक अन्य भारतीय- यशवीर सिंह को कांस्य पदक मिला। रोहित यादव पदक नहीं जीत सके।
नीरज ने 85.83 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो किया तो यश वीर 85.41 मीटर दूर भाला फेंक पाए। इस इवेंट में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा का यह दूसरा मेडल है। उन्होंने 2018 में गोल्ड जीता था जबकि 2022 में गेम्स में हिस्सा नहीं किया था।
भले ही नीरज चोपड़ा गोल्ड मेडल नहीं जीत पीए लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में एक बड़ा कारनामा करने में सफल हो गए। नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जैवलिन थ्रो इवेंट में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतने वाले भारत के पहलरे एथलीट बन गए हैं। नीरज ने साल 2018 में जैवलिन थ्रो इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था। उस समय नीरज ने 86.47 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था। अब नीरज ने ग्लासगो गेम्स में जैवलिन थ्रो इवेंट में 85.83 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल जीतने में सफलता हासिल की।
इसी मुकाबले में भारत की झोली में दूसरा पदक डालने का श्रेय मिला युवा एथलीट यशवीर सिंह को। यशवीर की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही थी जब उनका पहला थ्रो फाउल हो गया। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर और तीसरे में 81.33 मीटर का थ्रो फेंककर वापसी की लय पकड़ी। चौथे प्रयास में एक बार फिर फाउल और पांचवें प्रयास में 76.95 मीटर के थ्रो के बाद ऐसा लगा कि शायद पदक उनसे दूर जा रहा है। लेकिन यशवीर ने अपने खेल का सबसे शानदार रूप आखिरी थ्रो के लिए बचाकर रखा था। अपने छठे और अंतिम प्रयास में यशवीर ने पूरी जान झोंक दी और 85.41 मीटर का थ्रो फेंक डाला। यह न केवल उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (पर्सनल बेस्ट) था, बल्कि इसने उन्हें कांस्य पदक भी पक्का करा दिया।












