रविवार को महिला थाना परिसर में हुई काउंसलिंग के बाद पारिवारिक कलह और आपसी मनमुटाव के कारण अलग रह रहे 10 दंपतियों ने अपने मतभेद भुलाकर एक साथ रहने का फैसला किया। इस पहल के बाद सभी जोड़ों को उनके परिवारों के साथ विदा किया गया, जिससे उनके जीवन में खुशियां लौट आईं। ये परिवार घरेलू विवादों के कारण टूटने की कगार पर पहुंच गए थे। पति-पत्नी के बीच बढ़ती दूरियों ने रिश्तों में खटास पैदा कर दी थी। मामला महिला थाना पहुंचने पर दोनों पक्षों को बुलाया गया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। बातचीत और समझाइश के कई दौर चले, जिसके बाद पति-पत्नी अपने पुराने गिले-शिकवे भूलकर एक बार फिर साथ रहने के लिए तैयार हो गए। महिला थाना प्रभारी निरीक्षक भाग्यवती पाण्डेय ने बताया कि छोटी-छोटी गलतफहमियां और संवादहीनता अक्सर बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं। पाण्डेय ने आगे कहा कि समय पर बातचीत और समझदारी से ऐसे विवादों का समाधान संभव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिवारों को टूटने से बचाना और रिश्तों में विश्वास बहाल करना समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान महिला हेड कांस्टेबल आशा गौड़, महिला हेड कांस्टेबल रीना रावत, महिला आरक्षी प्रियंबदा सिंह, महिला आरक्षी शिखा खरवार तथा महिला आरक्षी शिवानी सिंह ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम के प्रयासों से इन 10 परिवारों के बीच बनी दूरियां समाप्त हुईं। रविवार को एक साथ 10 परिवारों का पुनर्मिलन होने से महिला थाना परिसर का माहौल भावुक और खुशी भरा रहा। परिजनों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया। कई दंपतियों ने भविष्य में आपसी संवाद बनाए रखने और छोटे विवादों को बड़ा रूप न देने का संकल्प लिया।
महिला थाना की पहल, 10 परिवार फिर हुए एक:आपसी मनमुटाव भुलाकर दंपतियों ने साथ रहने का लिया फैसला
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