श्रावस्ती जिले में इस साल आम की फसल पर संकट गहरा गया है। अधिकांश बागानों में आम की पैदावार में कमी देखी जा रही है, जिससे बागान ठेकेदारों को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है। ठेकेदार आमतौर पर बागानों को तीन से पांच साल के लिए पट्टे पर लेते हैं। सामान्यतः, यदि एक साल फसल अच्छी हो और अगले साल कम, तो नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो जाती है। हालांकि, इस बार स्थिति अलग है। बाग ठेकेदार पहलवान और आसिफ के अनुसार, जिले के कई अन्य बागानों में आम की पैदावार बहुत कम हुई है, जिससे उन्हें इस साल घाटा होने की आशंका है। ठेकेदारों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि उन्हें बागान मालिकों को हर साल तयशुदा राशि का भुगतान करना होता है, भले ही फसल की पैदावार कम हो। इसके अतिरिक्त, ठेके की शर्तों में ‘डाली’ की व्यवस्था भी शामिल होती है, जिसके तहत बागान मालिकों को हर साल निश्चित मात्रा में आम देना अनिवार्य होता है। फसल कम होने के बावजूद इन जिम्मेदारियों को पूरा करना ठेकेदारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस वर्ष कम बारिश का भी आम की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हालांकि जिले के कुछ हिस्सों में अच्छी वर्षा हुई, लेकिन कई क्षेत्रों में बारिश अपर्याप्त रही। इसका सीधा असर आम के आकार, रंग और मिठास पर देखा गया है। किसानों और व्यापारियों के मुताबिक, पर्याप्त नमी न मिलने के कारण आम की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और उनका सही आकार विकसित नहीं हो पाया है। बागान ठेकेदार आसिफ और पहलवान ने बताया कि इस बार उनके बागों में पिछले साल की तुलना में आम की फसल काफी कम है, जिससे उन्हें नुकसान होगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आम की कम आवक के कारण सम्बंधित क्षेत्र के बाजार में इसके दाम बढ़ सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, जबकि बागान ठेकेदारों के नुकसान की भरपाई भी पूरी तरह नहीं हो पाएगी।
श्रावस्ती में कई बागान मे आम की पैदावार घटी:बागान ठेकेदारों को होगा नुकसान, बाजार में बढ़ सकते हैं दाम, ठेकेदारों की बढ़ी चिंता
RELATED ARTICLES
Recent Comments
on Hello world!












